भक्त और भगवान एक दूसरेके पूरक हैं, भक्त अपने भक्ति के बल से धरती पर प्रलय रोक सकता है ! काली दास . महराज

भगीरथ अपने भक्ति के बल से गं गा को पृथ्वी पर . आने को मजबूर किए

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ब्यूरो प्रयागराज।  मां काली के अनन्य भक्त काली दास महराज ने कहा है कि भक्त और भगवान एक दूसरे के पूरक है।भगवान केबिना इच्छा केकिसी मनुष्य मेंभक्ति नहीं आ सकतीऔर ना तो भक्त की इच्छा के विरुद्धभगवान कुछ करते हैं। उन्होंने दावा किया किसच्चा भगवान का भक्त पृथ्वी पर आने वाले प्रलय को रोक सकता है जैसे भागीरथराजा नेअपने भक्त और तपस्या के बल पर गंगा जी को पृथ्वी लोक मेंआने पर मजबूर कर दिया जो आजइस प्रयागराज में जीवन दायनी बनी हुई है।
 
भागीरथ नेअपने तपस्या और भक्ति के बल परअपने पूर्वजों का कल्याण किया ही लेकिन आज वही गंगामाता पृथ्वी परआस्था का सैलाब बहा रही हैं। इसी आस्था के सैलाब मेंभारत देश से ही नहीं विश्व सेलोग आकर इस सैलाब मेंपुण्य और जनकल्याण के लिए गोता लगा रहे हैं।
 
गंगा तट पर सेक्टर नंबर पांच में जन कल्याण का पंडाल लगाए कालिदास जी कामाख्या देवी के घोर पुजारी हैं।उनका मानना है कि मां सदैव कल्याण के लिए ही पृथ्वी पर  कार्य करती है।जब लोक कल्याणऔर भक्तों की आस्था पर संकट आता है तो वह काली दुर्गा पीतांबराऔर अनेक देवियों का रूप धारण करकेआती है।औरभक्तों के कार्य में बाधा उत्पन्न करने वालों का संघार करती है।
 
 महा कुंभ 2025 मे पहली बार - अपना शिविर लगाने वाले काली दास - महराज दुसरी वार यहाँ शिविर लगाकर भक्तो को देवी के चमत्कार के बारे  मे बताते हुए हवन  दान - पुन्य के महत्व के बारे मे बताते  है।  उनका कहना है जो देवी महाकानी कामांच्छा के भक्ति मे लीन होगा वह जो चाहेगा पूर्ण हो गा ।
 
- काली दास जी का मानना है कि माघ माह में आकर  जो गंगा के तट पर भक्ती भावना से स्नान और - दान पुण्य करता है उसको अवस्य ही उससे अधिक प्राप्त हो जाता है ।उन्होंनकहा  कि परिवार मे रह कर  भी व्यक्ति ईश्वर और मा देवी का पक्का भक्ति कर सकता है । लेकिन अधूरे मन से नही ।
 
उन्होंने बताया कि भक्ति भावना से परिवार पुत्र पत्नी भाई तथा समाज के लोगो में भक्ति भावना  दान पुण्य  हवन पूजन की भावना बढती है ।उससे बच्चो मे अच्छे संस्कार  पैदा होते है।वह कु मारर्ग पर नही जाते आज का नव जवान  भ टक गया है ।मोबाइल के युग मे गलत रास्ता  पकड़ रहा है इससे  बचने का एक मात्र रास्ता है ईश्वर भक्ति उस भक्त को मां देवी कुमार्ग पर नहीं जाने देती।उसकी जो इच्छा होती है  ईश्वर पूरा करता है।
 
कालीदास जी महराज सबसे अधिक हवन  कराने पर जोर देते है उनका मानना है कि  देवी काली सबसे अधिक हवन से प्रशन्न होती है। इससे वातावरण शुद्ध होता है पर्यावरण शुद्ध होता हैं  मनुष्य स्वस्थ रहता है और उसकी बुद्धि  भी  शुद्ध होती है ।
 
उन्होंने बताया कि वे अव तक वे  कामाख्या  देवी के लिये 40  हवन यज्ञ करा चुके है और 108 यज्ञ  कराने का  संकल्प है । इसके लिले वे अपनी दुकान मोटर गाड़ी सब बेच दिये। 1993 से वह देवी की पूजा कर रहे है और पहला  व्रत नवराड मे सीधी  मध्य प्रदेश से शुरु किये थे मध्य प्रदेश के रीवा के निवासी काली दास जी  काम ख्या देवी के  उपाशक बन गए।15 हजार उनके अनुयाई भक्त है।
 
दयाशंकर त्रिपाठी की  रियोर्ट 
 
 

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