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Indian Railways: ट्रेन के डिब्बों के क्यों होते हैं अलग-अलग रंग? ये है बड़ी वजह
Indian Railways: भारत में आज भी बड़ी संख्या में लोग यात्रा के लिए सबसे पहले ट्रेन को प्राथमिकता देते हैं। लंबी दूरी के सफर में ट्रेन सुविधाजनक, किफायती और आरामदायक मानी जाती है। वहीं मुंबई में लोकल ट्रेन को लोगों की लाइफ लाइन कहा जाता है। ट्रेन का सफर अलग अनुभव देता है—रास्ते में आने वाले गांव, खेत, पहाड़ और प्रकृति के कई नज़ारे इसे यादगार बनाते हैं। आपने भी कई बार ट्रेन से यात्रा की होगी और शायद यह भी देखा होगा कि ज्यादातर ट्रेनों के डिब्बों का रंग नीला होता है, जबकि कुछ डिब्बे लाल, हरे या भूरे भी दिखते हैं। आखिर ऐसा क्यों?
क्यों होते हैं ट्रेन के डिब्बों के अलग-अलग रंग?
ट्रेन के डिब्बों का रंग उनकी गति, डिजाइन और उपयोग के आधार पर तय किया जाता है। नीले रंग के कोच पारंपरिक ICF कोच होते हैं। ये मध्यम गति वाली ट्रेनों में उपयोग किए जाते हैं और भारतीय रेल में कई दशकों से चल रहे हैं।
लाल रंग के डिब्बे आधुनिक LHB कोच होते हैं, जो जर्मन तकनीक से तैयार किए गए हैं। ये तेज गति के लिए बने होते हैं और अधिक सुरक्षित भी माने जाते हैं। हरे रंग के कोच आमतौर पर गरीब रथ ट्रेनों में इस्तेमाल किए जाते हैं, जिनमें एसी सुविधा कम किराए पर मिलती है।
भूरे रंग के कोच पुराने मीटर गेज नेटवर्क में उपयोग किए जाते थे, जो अब अधिकांश स्थानों पर ब्रॉड गेज में बदल दिए गए हैं।
कोच पर बनी रंगीन पट्टियों का मतलब क्या होता है?
अगर आपने ध्यान दिया हो तो कई कोचों पर पीली, सफेद, लाल या हरी पट्टियाँ भी बनी होती हैं। इन पट्टियों का अपना विशेष अर्थ है। पीली पट्टी यह दर्शाती है कि डिब्बा दिव्यांग यात्रियों या चिकित्सा सहायता की जरूरत वाले यात्रियों के लिए आरक्षित है।
सफेद पट्टी नीले रंग के ICF कोचों पर पाई जाती है और जनरल क्लास को दर्शाती है। लाल पट्टी प्रथम श्रेणी (First Class) कोच होने का संकेत देती है। हरी पट्टी महिलाओं के लिए आरक्षित डिब्बों पर लगाई जाती है।
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imskarwasra@gmail.com
संदीप कुमार मीडिया जगत में पिछले 2019 से ही सक्रिय होकर मीडिया जगत में कार्यरत हैं। अख़बार के अलावा अन्य डिजिटल मीडिया के साथ जुड़े रहे हैं। संदीप का पॉलिटिकल न्यूज, जनरल न्यूज में अनुभव रहा है। साथ ही ऑनलाइन खबरों में काफी अनुभव है l

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