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हैंडपंप घोटाले ने खोली पोल, अब उठ रही मांग—जिले के सभी 16 ब्लॉकों में हो व्यापक जांच
गोंडा। जिले के एक ब्लॉक में हैंडपंप मरम्मत और रिबोर के नाम पर 3.48 लाख रुपये के घोटाले का पर्दाफाश होने के बाद अब मामला जिला-व्यापी चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों व सामाजिक संगठनों का कहना है कि अगर प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेकर पूरे जनपद के 16 विकासखंडों में इसी तरह की जांच कराए, तो करोड़ों रुपये का गबन उजागर हो सकता है।
वर्तमान में गोंडा जिले में कुल 16 विकासखंड हैं— 1. बभनजोत, 2. बेलसर, 3. छपिया, 4. कर्नलगंज, 5. हलधरमऊ, 6. इटियाथोक, 7. झंझरी, 8. कटरा बाज़ार, 9. मनकापुर, 10. मुजेहना, 11. नवाबगंज, 12. पंडरी कृपाल, 13. परसपुर, 14. रुपईडीह, 15. तरबगंज और 16. वजीरगंज।

ग्रामीणों का कहना है कि इन सभी ब्लॉकों में वर्षों से हैंडपंप मरम्मत, रिबोर, हिस्से बदलने और श्रमशुल्क के नाम पर बड़ी धनराशि स्वीकृत होती रही है, लेकिन जमीनी हकीकत में कई स्थानों पर बिना काम भुगतान, कागज़ी मरम्मत, और फर्जी बिलिंग जैसे मामलों की शिकायतें बार-बार सामने आती रही हैं।
हालिया जांच में पाया गया कि जिन हैंडपंपों की मरम्मत और रिबोर का भुगतान दर्शाया गया था, उनमें से किसी भी हैंडपंप पर वास्तविक कार्य नहीं हुआ। रिपोर्ट जिलाधिकारी को भेजी जा चुकी है, जिसमें ब्लॉक स्तर के कई जिम्मेदार कर्मचारियों पर कार्रवाई की संस्तुति की गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि—“अगर इतने बड़े घोटाले का खुलासा एक ब्लॉक में हुआ है, तो बभनजोत से लेकर वजीरगंज तक सभी 16 ब्लॉकों की जांच होना बेहद जरूरी है। इससे प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ेगी और यह भी सामने आएगा कि धन किस स्तर पर और किस प्रकार फर्जी भुगतान के माध्यम से किया जा रहा है।”जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी से मांग की है कि पूरे जिले में विशेष जांच दल (SIT) गठित करके सभी ब्लॉकों में हैंडपंप मरम्मत की फाइलों का टेक्निकल ऑडिट व भौतिक सत्यापन कराएं। फिलहाल जनता की निगाहें जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि जांच सिर्फ एक ब्लॉक तक सीमित न रहकर, पूरे जिले की व्यवस्था को पारदर्शी बनाने का मार्ग प्रशस्त करेगी।

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