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एसआईआर की अव्यवहारिक रात्रिकालीन ड्युटी से गुरुजी की बढ़ी मुश्किलें
-जनपद में बीएसए का धमकीभरा आदेश वायरल , बना चर्चा का विषयबिना ट्रेनिंग गुरुजीबनगएआपरेटरप्रक्रियागत दोष का शिकार हो रही जनता व कर्मचारी
बस्ती। बस्ती जिले के कप्तानगज राष्ट्रहित से जुड़े एसआईआर जैसे कार्यक्रम में अधिकारियों की मनमानी कर्मचारियों व जनता पर भारी पड़ रही है जिसके दुष्परिणाम भी देखने को मिल रहे हैं । कई जिलों से कर्मचारियों के आत्महत्या जैसे मामले भी सामने आए हैं । कर्मचारियों के मौत का कारण कुछ भी हो परन्तु समाज घटनाओं को एसआईआर से ही जोड़ कर देख रहा है।
प्राप्त समाचार के अनुसार इस समय एसआईआर का कार्य पूरे प्रदेश में चल रहा है जिसको लेकर तरह - तरह के आदेश निर्देश जारी किए जा रहे हैं । कुछ जिलों के अधिकारियों के आदेश की भाषा अत्यन्त ही अलोकतांत्रिक , पीड़ादायक व निन्दनीय है तो वहीं बस्ती के विकास खण्ड कप्तानगंज में खण्ड शिक्षा अधिकारी द्वारा एसआईआर हेतु कर्मचारियों की शिफ्टवार प्रातः 8 बजे से शाम तीन बजे व शाम तीन बजे से रात्रि 8 बजे तक लगायी गयी है । कुछ बहादुरपुर विकास खण्ड से भी कर्मचारी लगे हैं जिनको कप्तानगंज आने में लगभग 10 से 15 किमी. की दूरी तय करनी पड़ रही है । यद्यपि एसआईआर एक जरूरी प्रक्रिया है उससे भी कहीं ज्यादा कर्मचारियों का स्वास्थ्य एवं सुरक्षा भी जरूरी है ।
निर्देश देना व निर्देश को कार्य रूप देते हुए उसे जमीन पर उतारने में काफी भिन्नता है । ऊपर से एसआईआर करने का फरमान जारी होते ही प्रक्रिया शुरू हो जाती है और बूथ लेबल अधिकारी को फार्मों का बंडल थमाने में वैसे ही दस दिन निकल जाते हैं । इसके बाद बीएलओ स्तर से उसको मकानवार अलग करने में सप्ताह भर लग जाते है । इसीप्रकार फार्मों को घर - घर बांटने व रिसीव कराने में भी एक सप्ताह , अब जाकर 15 - 20 दिन बाद फार्म मतदाता के हाथ में पहुंचता है जो कि कम पढ़ा लिखा व फार्म से अनभिज्ञ है । अब फिर बीएलओ के पास उसे भरने - भरवाने की जिम्मेदारी आती है तब तक कार्यवाहियों एवं आत्महत्या का दौर शुरू हो जाता है । प्रक्रियागत दोषों का शिकार कर्मचारी व जनता सीधे तौर पर हो रही जबकि अधिकारी इन सबकी परवाह किए बगैर अपने कुर्सी को मजबूत करने में व्यस्त हैं ।

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