बीएलओ का बीमा करवाये - निर्वाचन आयोग 

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देश के बारह राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य की समय-सीमा के चलते कार्य की अधिकता के कारण मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों से बीएलओ की आत्महत्या की खबरें आना वाकई बेहद दुखद है! एस आई आर कार्य के चलते बीएलओ की बढ़ती आत्महत्या की खबर भारत निर्वाचन आयोग के कानों तक पहुँचीतो आयोग द्वारा तत्काल राज्यों से बीएलओ के संबंध में रिपोर्ट मांगी गई। निश्चय ही भारत निर्वाचन आयोग द्वारा राज्यों से बीएलओ की बढ़ती आत्महत्या की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद बीएलओ के हितार्थ कोई महत्त्वपूर्ण निर्णय भी लिया जा सकता है।

भारत निर्वाचन आयोग से एक निवेदन एवं सुझाव है कि वह निर्वाचन कार्य में संलग्न देशभर के बीएलओ का बीमा करवाएंताकि किसी भी बीएलओ के साथ यदि कभी कोई घटना घटती हैतो उसके परिवार को उसके नहीं रहने पर आर्थिक रूप से मजबूर नहीं होना पड़े। आज देशभर में अधिकांश बीएलओ शिक्षक हैं या फिर अन्य विभागों के तृतीय श्रेणी के कर्मचारी हैंजिन्हें कुछ राज्य सरकार बीमा और पेंशन तक की सुविधा उचित रूप से नहीं दे पा रही हैं। फिर भी कर्मचारी सरकार के सभी कार्यों का पालन ईमानदारी से करते हैं । 

 देश के हर राज्य में सरकारी कर्मचारी अपनी क्षमता से अधिक कार्य करके सरकार की योजनाओं को जमीनी धरातल पर उतारते हैं। कुछ दो–पांच प्रतिशत कर्मचारी भले राजनीतिक शह के चलते अपने कार्य से बच जाते हैंलेकिन यह याद रखना चाहिए कि कर्मचारियों के बूते ही नौकरशाही चलती है। पिछले कुछ वर्षों से एक चलन बन गया है कि अव्वल आने की चाहत में कुछ जिलाधीश राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री के हाथों पुरस्कृत होने की इच्छा में अपने कर्मचारियों पर क्षमता से कहीं अधिक कार्य करने का दबाव डालते हैं।

उनकी मंशानुरूप कार्य नहीं कर पाने वाले कर्मचारियों का या तो वेतन रोक लिया जाता है या फिर निलंबन किया जाता हैजिससे निचले स्तर के कर्मचारियों पर अपने ही अधिकारियों का दबाव अत्यधिक बढ़ जाता है और कर्मचारी परेशान होकर आत्महत्या तक को मजबूर हो जाते हैं। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य में बीएलओ की आत्महत्या के पीछे मुख्यतः यही कारण है कि जिले के एसी चेंबर में बैठने वाले और एसी गाड़ियों में घूमने वाले कुछ अधिकारी जमीन पर चलने वाले बीएलओ की मजबूरी नहीं समझ पाते और अनावश्यक कार्य का दबाव डालते हैंजिससे कर्मचारी आत्महत्या को मजबूर होते हैं ।           

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       भारत सरकार और भारत निर्वाचन आयोग को चाहिए कि वर्षभर चलने वाले निर्वाचन जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रम में संलग्न रहने वाले जमीनी स्तर के सभी बीएलओ कर्मचारियों का बीमा करवाया जाए और उनकी पदस्थ संस्था में राष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान उनके कार्य का बोझ कम किया जाए। साथ हीजिले की अफसरशाही को भी भौगोलिक स्थितियों के आधार पर अपने कर्मचारियों का मनोबल तोड़ने की बजाय बढ़ाकर कार्य करने की नसीहत देना होगी। तभी बीएलओ और अन्य कर्मचारी निर्भीक होकर अपने कार्य को अधिक कुशलता से संपन्न करेंगेजिससे आत्महत्या जैसी घटनाएँ नहीं होंगी और शासकीय विभागों की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्नचिह्न नहीं लगेगा ।अतएव निर्वाचन कार्य में संलग्न देश के बीएलओ का निर्वाचन आयोग को बीमा करवाने पर विचार करना चाहिए।

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