कविता-हवा में खुशबू बन जाऊंगा मैं

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संजीव-नी।। 
 
हवा में खुशबू बन जाऊंगा मैं ll 
 
तेरी पलकों में समाँ जाऊंगा मैं। 
तेरे स्वप्न में आज आ जाऊंगा मैं। 
 
महकती बयार बन जाएगी तू, 
तेरी सांसों में समा जाऊंगा मैं।।
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महलों की अजीम शान है तू।
तेरे लिए शीशा बन जाऊंगा मैं ।। 
 
कहां खोजूं किस दर पर जाऊं ।
तलाश में तेरी बावरा जाऊंगा मैं।। 
 
न तेरा पता ना तेरी कोई खबर, 
बिन तेरे अंधेरे में खो जाऊंगा मैं ।। 
 
तेरी यादों का सबब मैं तो नही
यादों की महक बन जाऊंगा मैं ll 
 
सितारों की रोशनी से रोशन तू, 
रातों का जुगनू बन जाऊंगा मैं। 
 
तेरी अंखियों में अपनी शरारत छोड़ , 
हवा में तसव्वुर बन जाऊंगा संजीव ll 
 
संजीव ठाकुर

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