Swantantra prabhat kavita sangrahn

कविता

संजीव-नी।मंगलू ने पी शराब,तब से हुई किस्मत खराब।मंगलू कभीअपने नाम जैसा सीधाहाथों में मेहनत,आँखों में भरोसा था,और घर मेंरोटी की खुशबू रहतीफिर एक दिननशे की बोतल नेउसे दोस्त कहा...
कविता/कहानी  साहित्य/ज्योतिष 

कविता-हवा में खुशबू बन जाऊंगा मैं

संजीव-नी।।     हवा में खुशबू बन जाऊंगा मैं ll     तेरी पलकों में समाँ जाऊंगा मैं।  तेरे स्वप्न में आज आ जाऊंगा मैं।     महकती बयार बन जाएगी तू,  तेरी सांसों में समा जाऊंगा मैं।। . महलों की अजीम शान है तू। तेरे...
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