वोट किसान से और कार्य उद्योगपतियों का आखिर कब तक चलेगा- अंजनी कुमार दीक्षित

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लखीमपुर खीरी - आर्थिक तंगी में अपने हक के लिए जब पुत्र अपने पिता से, भाई अपने सगे भाई से लड़ सकता है तो हम किसान बजाज ग्रुप के शोषण खिलाफ अपना परिवार चलाने के लिए अपनी सरकार से क्यों नहीं जब वोट देते हैं तो अपना हक भी मांग सकते हैं यह हमारा अधिकार है अधिक अपनी पार्टी के दबाव में कब तक बर्दाश्त करते रहेंगे कितने कर्ज के दलदल में जाएंगे अपने परिवार का भविष्य क्या होगा क्या कोई और भी कर्ज लेने का रास्ता बचा है कैसे खेती चलेगी कैसे परिवार चलेगा कैसे खर्च पूरे होंगे यह सोचनीय विषय है। 
 
हम तो आप आपको अपना मानते हैं साहब,  आप भी तो हमें अपना मानिए,,वोट किसान से, कार्य उद्योगपतियों का, आखिर कब तक चलेगा, चीनी मिल किसान एक दूसरे के पूरक है हम तो अपना कर्तव्य हमेशा पूरा करते हैं पूरे सीजन का गन्ना आपको दे दिया आप हमें फूटी कौड़ी भी नहीं देना चाहते आखिर सरकार और चीनी मिल हम मेहनत करने वाले किसानों को सड़कों पर उतरने के लिए आखिर क्यों मजबूर कर रहे हो।
 

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