अब भी बरकरार है हर  पुराना खतरा

 अब भी बरकरार है हर  पुराना खतरा

देश में आम चुनाव हो गए । गठबंधन की नयी सरकार बन गयी । विभागों का वितरण भी हो गया। छत्तीसगढ़ में हिंसा भी हो गयी ,और सबसे बड़ी बात की जिस मणिपुर की हिंसा पर प्रधानमंत्री आजतक नहीं बोले उसके बारे में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के अधिनायक डॉ मोहन भागवत भी बोल गए। इस सबके बावजूद  असली बात ये है कि चुनाव से पूर्व देश जिन खतरों का समान कर रहा था ,वे सब आज भी बरकरार हैं। आप गौर से देखें तो ये नई सरकार अल्पमत की और गठबंधन   की सरकार जरूर हैं लेकिन इसका केवल नाम बदला हैं,काम नही। नई सरकार के हाथों में आज भी वे सब हथियार और सिपाहसालार हैं जो चुनाव से पहले आपके मंगलसूत्र के लिए खतरा बता रहे थे । आपकी भैंस खोले जाने का हौवा खड़ा कर रहे थे । हिन्दू-मुसलमान और धर्म के आधार पर आरक्षण को रोकने की बात कर रहे थे। यानि हौवा भी मौजूद हैं और हौवा खड़े करने वाले भी।

 गठबंधन कि सरकार में ईडी और सीबीआई जैसे हिंसक चौपाये अभी भी गठबंधन कि अगुवाई कर रही भाजपा के पास हैं। यानि विपक्ष को कुचलने और परेशान करने के सारे औजार भाजपा ने अपने हाथों में रखे है।  सहयोगी दलों को उन्हें छूने भी नहीं दिया,क्योंकि मुमकिन हैं कि आने वाले कल में इन हथियारों का इस्तेमाल  भाजपा को अपने गठबंधन के साथियों के खिलाफ ही करना पड़े ! अतीत  में भाजपा ने ऐसा  किया भी हैं। माननीय प्रधानमंत्री जी ने जिस हिकमत अमली से नए मंत्रियों को विभागों का वितरण किया हैं उससे साफ़ जाहिर हैं कि उनकी निगाहें कहीं  और निशाना कहीं और हैं। माननीय का देश को कांग्रेस विहीन   करने का सपना अभी मरा नहीं हैं बल्कि शीतनिन्द्रा में चला गया हैं। जैसे ही आने वाले दिनों में महाराष्ट्र,जम्मू-कश्मीर और हरियाणा जैसे राज्यों के विधानसभा चुनावों कि घोषणा होगी इस सरकार के छिपे हुए नाखून फिर से बाहर निकल आएंगे ।  आपको पता हैं न कि नाखून छिपाने की कला केवल हिंसक प्रवृत्ति के जानवरों में होती हैं,भले ही वे जंगली जानवर  हों या पालतू।

आपको भूलना नहीं चाहिए कि भाजपा 365  दिन, 24  घंटे चुनावी मोड में रहने वाली पार्टी हैं। इसलिए ये पार्टी अपना 2029  और 2047  तक   का सपना पूरा करने के लिए आने वाले दिनों में क्या कुछ करेगी,कहना कठिन हैं। मै तो मश्विरा दूंगा कि नयी सरकार में इतने सारे विभागों के साथ एक पृथक विभाग चुनावों का होना चाहिये । इसका प्रभार माननीय प्रधानमंत्री खुद अपने पास रखें। इस विभाग के लिए बजट के साथ ही 'चुनाव केयर फंड ' भी बनाया जाना चाहिए ' प्रधानमंत्री केयर फंड की तरह। इस तरह के फंड का कोई हिसाब-किताब न रखना पड़ता हैं और न देना पड़ता हैं। और यदि गिरीश मुर्मू जैसा सीएजी हो तो इसकी जांच भी कोई नहीं कर सकता। बहरहाल बात चल रही थी उन खतरों की जो बरकरार है।  पहला खतरा संविधान पर ही हैं। माननीय ने भले ही संसदीय दल ,गठबंधन और सदन का नेता चुने जाने से पहले संविधान की प्रति को  माथे से लगाया था लेकिन देश में शायद ही किसी को   इस बात पर यकीन हो कि नयी सरकार संविधान की कसम खाकर सबके साथ सबका विकास करेगी। नई सरकार में देश कि 20  करोड़  की मुस्लिम   आबादी का कोई प्रतिनिधि नहीं है।

 माननीय राष्ट्रपति चाहें भी तो इस समाज के किसी प्रतिनिधि को सदन में नामजद कर उसे मंत्री बनाने के लिए भी नहीं कह सकतीं। उनके हाथ बंधे हैं। यानी भाजपा हिन्दू  राष्ट्र तो नहीं बना सकी लेकिन उसने देश को एक हिन्दू सरकार जरूर दे दी ,जिसमें  भाजपा की दुश्मन नंबर दो मुसलमान बिरादरी नहीं है।  भाजपा की दुश्मन नंबर एक तो कांग्रेस हैं ,जो बीते दस साल में मर कर भी नहीं मर रही ।  हर चुनाव के बाद दोगुने उत्साह से खड़ी हो जाती है। भले ही सत्ता उसके लिए अभी भी कोसों दूर हैं सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात   संघ प्रमुख डॉ मोहन भागवत का बयान हैं जो उन्होंने नई सरकार को समझाइश बतौर दिया हैं। डॉ मोहन भागवत की भागवत को भाजपा पहले ही सुनने से इंकार कर चुकी है।  चुनावों के बीच में ही भाजपा अध्यक्ष माननीय जेपी नड्ढा जी ने अपने श्रीमुख से कहा था कि भाजपा को संघ की जरूरत नहीं हैं। उन्होंने एकदम सही कहा था ।  भाजपा को भले संघ  की जरूरत न हो किन्तु संघ को तो भाजपा कि जरूरत है।  संघ ने तो आजतक नहीं कहा कि उसे भाजपा की जरूरत नहीं हैं ? संघ प्रमुख शंकराचार्य  की मुद्रा में नयी सरकार को सीख दे रहे हैं कि नई सरकार जलते मणिपुर को देखे ।

 विपक्ष को प्रतिपक्ष समझे। डॉ भागवत ने भाजपा को बेनकाब करते हुए मुजाहिरा किया हैं कि "इस बार भी हमने अपने लोकमत जागरण का काम किया है. वास्तविक सेवक मर्यादा का पालन करते हुए चलता है. अपने कर्तव्य को कुशलता पूर्वक करना आवश्यक है."लेकिन क्या राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में देश के असली  शांकराचार्यों की बात न मानने वाले लोग संघ के शंकरचार्य की बात मानेंगे ?
चूंकि मै अविनाशी नहीं हूँ इसलिए मेरे पास कोई तीसरा नेत्र नहीं हैं ,किन्तु मेरे पास एक अंतर्चेतना हैं जो मुझे आगाह करती है।  मुझे लगता हैं कि जिस तरह माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी जी ,उनकी भाजपा ने अपना एजेंडा नहीं बदला हैं उसी तरह संघ ने भी अपना एजेंडा नहीं बदला हैं। डॉ भागवत ने कहा, "हजारों वर्षों से जो पाप हमने किया, उसका प्रायश्चित करना होगा।  भारतोद्भव जो लोग हैं, उनसे मिलना आसान है क्योंकि इसकी एक ही बुनियाद है।  वही यम नियमात्मक आचरण का पुरस्कार सर्वत्र है।  पैगंबर साहब का इस्लाम क्या है, सोचना पड़ेगा ? ईसा मसीह की ईसाइयत क्या है सोचना पड़ेगा ?

भगवान ने सबको बनाया है।  भगवान की बनाई जो कायनात है, उसके प्रति अपनी भावना क्या होनी चाहिए सोचना पड़ेगा ? जाहिर हैं कि ये एक छिपी हुई धमकी हैं उन लोगों के लिए जिन्हें भाजपा और संघ भारतीय  नहीं मानता। इन लोगों में 20  करोड़ मुस्लिम ही नहीं बल्कि वे लोग भी हैं जो प्रश्न करते हैं,जो अंधविश्वास के खिलाफ खड़े होते हैं। जो संविधान की बात करते हैं। जिनकी भाषा  माननीयों को  अर्बन नक्सलियों की भाषा लगती हैं। जिसे  बोलने  वाले शाहजादे  नजर  आते  हैं। बहरहाल गठबंधन कि नई सरकार को लख-लख बधाइयां ,नए मंत्रियों को उनके नए विभाग मुबारक। खासतौर  पर मध्यप्रदेश के कोटे से मंत्री बनाये गए मामा शिवराज सिंह को बधाई  ,क्योंकि उन्हें वो जिम्मेदारी दी गयी हैं जो उनके मित्र  नरेंद्र सिंह तोमर  नहीं निभा पाए थे ।  तोमर के हिस्से में एक नाकाम कृषि मंत्री होना ही आया था। तोमर के दामन पर 700  किसानों की शहादत के चिन्ह हैं

राकेश अचल

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