ओवरलोड परिवहन पर एनटीपीसी की सख्ती, वाहन मालिकों का धरना शुरू
परिवहन दर बढ़ाने की मांग को लेकर एस डाइक परियोजना में ठप हुआ राख ढुलाई कार्य, आंदोलन तेज करने की चेतावनी
संतोष कुमार गुप्ता ( संवाददाता)
बीजपुर /सोनभद्र-
एनटीपीसी रिहंद प्रबंधन द्वारा ओवरलोड परिवहन पर सख्त कार्रवाई के निर्देश जारी किए जाने के बाद राख ढुलाई कार्य में लगे वाहन मालिकों ने परिवहन दरों में वृद्धि की मांग को लेकर बुधवार को सिरसोती गांव के अधौरा टोला में अपने वाहन खड़े कर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। वाहन मालिकों का कहना है कि वर्तमान दरों पर बिना ओवरलोडिंग के परिवहन कार्य करना आर्थिक रूप से घाटे का सौदा साबित हो रहा है।
धरने पर बैठे वाहन संचालकों ने आरोप लगाया कि ओवरलोड वाहनों पर लगातार चालान और कार्रवाई होने से उनकी आय प्रभावित हुई है, जबकि डीजल, रखरखाव और अन्य खर्चों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में मौजूदा दरों पर कार्य करना संभव नहीं है।
दर वृद्धि तक जारी रहेगा आंदोलन
मोटर एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज बैसवार एवं विजेंद्र सिंह उर्फ बग्गा सिंह ने बताया कि वर्तमान में भभुआ के लिए 920 रुपये प्रति टन तथा चंदौली के लिए 820 रुपये प्रति टन की दर से भुगतान किया जा रहा है, जो परिवहन लागत की तुलना में बेहद कम है। उन्होंने कहा कि जब तक संविदाकारों द्वारा परिवहन दरों में बढ़ोतरी नहीं की जाती, तब तक वाहन मालिक अपने वाहन खड़े रखकर विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगे।
धरना प्रदर्शन में सौरभ यादव, राजेश यादव, विजय यादव, बबलू सिंह, मुन्ना सिंह, दिनेश बैसवार, मोसिम शेख, रामबरन तथा संदीप केशरी सहित बड़ी संख्या में वाहन मालिक मौजूद रहे।
ओवरलोडिंग पर नहीं होगी कोई ढील : एनटीपीसी
इस संबंध में एनटीपीसी रिहंद के उप प्रबंधक (मानव संसाधन) रौशन कुमार ने स्पष्ट किया कि कार्यदायी संस्थाओं को निर्देशित किया गया है कि किसी भी परिस्थिति में ओवरलोड परिवहन नहीं कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि परिवहन दरों का निर्धारण वाहन मालिकों और संविदाकारों के बीच का विषय है तथा एनटीपीसी का मुख्य उद्देश्य नियमों के अनुरूप सुरक्षित एवं वैध परिवहन सुनिश्चित करना है।
मुख्य मांगें-परिवहन दरों में तत्काल वृद्धि।, बढ़ती लागत के अनुरूप भुगतान व्यवस्था, ओवरलोडिंग पर कार्रवाई के बाद नई दरों का निर्धारण, मांगें पूरी होने तक वाहनों का संचालन बंद रखने की चेतावनी। स्थिति पर नजर धरने के चलते एस डाइक क्षेत्र में राख परिवहन कार्य प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है। अब सभी की निगाहें संविदाकारों और वाहन मालिकों के बीच होने वाली संभावित वार्ता पर टिकी हैं।


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