आनन्दमार्ग के प्रवर्तक भगवान श्री श्री आनंदमूर्ति जी का जन्मोत्सव घूम-धाम से मनाया गया
"यदा- यदा हिधर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत
परित्राणाय साधुनां विनाशाय च दुष्कृताम ।
धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवानि युगे - युगे ।।"
अर्थात् साधुओं की रक्षा के लिए तथा दुष्ट लोगों के संहार के लिए भगवान मानव शरीर में आते हैं एवं मानवधर्म (भागवत धर्म) की स्थापना करते हैं।
आज से साढ़े सात हजार वर्ष पूर्ण मानव जीवन में मानव धर्म की स्थापना सदाशिव किये। भगवान शिव प्रथम तारक ब्रह्म हैं।
द्वितिय तारक ब्रह्म भगवान श्री कृष्णा हुए एवं आज जब विश्व अत्याधुनिक विज्ञान के चरम शीखर पर है मनुष्य ग्रह-उपग्रह पर जा रहा है। पृथ्वी सीमट गयी है इस अवस्था में भगवान, श्री श्री आनंदमूर्तिजी तारक ब्रह्म के रूप में अवतरीत हुए है। इनका आविर्भाव वैशाखी पूर्णिमा 1921 को जमालपुर मे हुआ। इन्होंने मानव जाति के सर्वात्मक कल्याण के लिए आनन्द मार्ग प्रचारक संघ की स्थापना किये जो 200 देश में आध्यात्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक कार्य कर रहा है। आज के दिन 105वाँ जन्म महोत्सव पृथ्वी के हर कोने मे बडे. हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है।
आनंद मार्ग जागृति में दीदी क्वार्टर में प्रातः 6:07 पर शंख ध्वनि के साथ जय घोष हुआ जैसे आनंद मार्ग अमर है, मानव मानव एक है, विश्व के नैतिकवादियों एक हों एक हों, जात-पात की करो विदाई मानव मानव भाई-भाई। भगवान श्री श्री आनंदमूर्ति जी की जय परम पिता बाबा की जय महासंभूति बाबा की जय तारक ब्रह्म बाबा की जय आदि तारों से वातावरण गुंजायमान हुआ।


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