एलपीजी संकट से निपटने को जिला प्रशासन सक्रिय

कोयला आपूर्ति व वैकल्पिक व्यवस्था शुरू

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स्वतंत्र प्रभात | बिहार के सुपौल से संवाददाता की रिपोर्ट
प्रकाशक – जितेंद्र कुमार राजेश

 

सुपौल। जिले में रसोई गैस (एलपीजी) की कमी को दूर करने के लिए जिला प्रशासन ने व्यापक कदम उठाए हैं। आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के प्रावधानों के तहत राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम से आच्छादित लाभुकों को जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) दुकानों के माध्यम से कुकिंग कोयले की आपूर्ति की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इस संबंध में सभी प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारियों एवं अनुमंडल पदाधिकारियों को आवश्यकता का आकलन कर आवंटन की मांग करने का निर्देश दिया गया है।

वहीं, बिहार राज्य खनन लिमिटेड द्वारा जिले में दो कोयला विक्रेताओं के चयन हेतु राज्य स्तर पर आम सूचना जारी की गई है।जिला प्रशासन द्वारा वैवाहिक कार्यक्रमों में उपयोग के लिए वाणिज्यिक एलपीजी की आपूर्ति पहले से सुनिश्चित कराई जा रही थी, जिसे अब श्राद्ध, मुंडन, उपनयन एवं अन्य सामाजिक-धार्मिक कार्यक्रमों तक विस्तारित कर दिया गया है। इसके लिए संबंधित रसोइयों एवं कैटरर्स को तेल कंपनियों के पास पंजीकरण कराना होगा, जो 5 से 7 दिनों के भीतर पूरा किया जाएगा।

कार्यक्रम आयोजित करने वाले व्यक्तियों को आवश्यक सिलेंडरों की संख्या और अनुमानित लोगों की जानकारी के साथ अनुमंडल पदाधिकारी को आवेदन देना होगा, जिसके आधार पर गैस उपलब्ध कराई जाएगी।सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे गैस एजेंसियों एवं पेट्रोल पंपों पर लगातार निगरानी की जा रही है, ताकि ईंधन की कालाबाजारी या अवैध आपूर्ति पर रोक लगाई जा सके। छात्रों, युवा पेशेवरों और प्रवासी श्रमिकों के लिए 5 किलो के गैस सिलेंडर बिना पते के प्रमाण के उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

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जिले में कुल 51 गैस एजेंसियों के पास लगभग 12,845 गैस सिलेंडर उपलब्ध हैं, जबकि 6,213 अतिरिक्त सिलेंडर प्राप्त होने की संभावना है। बीते 28 अप्रैल को करीब 5,158 उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर उपलब्ध कराए गए। वर्तमान में 23,815 उपभोक्ताओं को बुकिंग के अनुसार गैस की आपूर्ति की जानी है। प्रतिदिन औसतन 5,960 उपभोक्ताओं को घरेलू एलपीजी सिलेंडर वितरित किए जा रहे हैं। 51 में से 48 एजेंसियों पर गैस उपलब्ध है, जबकि शेष एजेंसियों पर शीघ्र आपूर्ति की उम्मीद है।

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जिला प्रशासन द्वारा निगरानी अभियान भी तेज किया गया है। अब तक 14 गैस एजेंसियों एवं 23 होटलों/प्रतिष्ठानों पर छापेमारी कर एलपीजी के उपयोग की जांच की गई है। कालाबाजारी और घरेलू गैस के वाणिज्यिक उपयोग के आरोप में तीन प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है। अस्पतालों एवं सरकारी संस्थानों को प्राथमिकता के आधार पर वाणिज्यिक गैस की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।

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उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं। किसी भी समस्या के समाधान के लिए उपभोक्ता 24×7 कॉमन इमरजेंसी नंबर 1906, इंडियन ऑयल (IOCL) के 1800-2333-555, भारत पेट्रोलियम (BPCL) के 1800-224344 तथा हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) के 1800-2333-555 पर संपर्क कर सकते हैं।

इसके अलावा समाहरणालय परिसर स्थित जिला आपदा प्रबंधन कार्यालय में नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है, जिसका दूरभाष संख्या 06473-224005 है। यहां प्राप्त सभी शिकायतों का त्वरित निष्पादन किया जा रहा है। पेट्रोल पंपों का भी औचक निरीक्षण जारी है और तेल कंपनियों के समन्वय से पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति सामान्य बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।

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