खड्डा में गूंजे “जय परशुराम” के नारे — राम-जानकी मंदिर में दिखा सनातन एकता का अद्भुत संगम
शिव शंभु सिंह
खड्डा (कुशीनगर)। अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर खड्डा स्थित राम-जानकी मंदिर परिसर में भगवान विष्णु के छठे अवतार, न्याय और धर्म के प्रतीक भगवान परशुराम की जयंती अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाई गई। इस भव्य आयोजन का नेतृत्व ‘विप्रगढ़’ एवं समस्त सनातन समाज द्वारा संयुक्त रूप से किया गया, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान परशुराम के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। मंदिर परिसर “जय परशुराम” के उद्घोष से गूंज उठा। वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि भगवान परशुराम केवल क्रोध के प्रतीक नहीं, बल्कि धर्म, न्याय और सत्य के रक्षक थे, जिनका जीवन समाज को अनुशासन और मर्यादा का संदेश देता है।इस अवसर पर खड्डा नगर के विभिन्न क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। ‘विप्रगढ़’ के सदस्यों की उत्कृष्ट व्यवस्था और स्थानीय लोगों के उत्साह ने आयोजन को और भी भव्य बना दिया। सभी ने एकजुट होकर भगवान परशुराम के आदर्शों को अपनाने और धर्म मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। श्रद्धालुओं ने आरती कर विश्व कल्याण की कामना की।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जनसेवक पवन दुबे उपस्थित रहे, जिन्होंने भगवान परशुराम के पदचिह्नों पर चलने का आह्वान किया। वहीं विशिष्ट अतिथियों में सुप्रिया मालवी, सुनील मिश्रा, बीएन पांडे, पवन मिश्रा, योगेश मिश्रा, धीरेंद्रधर द्विवेदी, महंत रामशरण दास जी महाराज, आचार्य जितेंद्र तिवारी, जगत बाबा, आनंद मणि त्रिपाठी, अश्वनी द्विवेदी, अंकित मिश्रा, आयुष शुक्ला एवं ओम प्रकाश दुबे सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण किया गया। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि समाज में एकता और भाईचारे का सशक्त संदेश भी दे गया।


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