सरकारी भूमि पर कब्जा कर प्लाटिंग

अब तहसील के दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो गई है।

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अरबों रुपये की सरकारी भूमि पर कब्जा कर प्लाटिंग तथा काफी हिस्सा बेचने के मामले की स्थानीय स्तर पर जांच अंतिम चरण में है। शहर पश्चिमी के काशीपुर उपहरहार, मरियाडीह और रसूलपुर गांवों में अरबों रुपये की सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने वाले भूमाफिया के खिलाफ कार्रवाई के बाद अब तहसील के दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो गई है।

एक राजस्व निरीक्षक को निलंबित किए जाने के साथ सेवानिवृत्त राजस्व निरीक्षण पर कार्रवाई के लिए शासन को रिपोर्ट भेजने के बाद अब अन्य अधिकारियों पर गाज गिरना तय बताया जा रहा है। वहीं अब कब्जा कर फर्जी तरीके से बेची गई जमीन के बैनामों को निरस्त कराने की प्रक्रिया भी शुरू करा दी गई है।

इन तीन गांवों में नगर निगम की कान्हा गोशाला की भूमि, चुनाव आयोग व एटीएस की लगभग 33 बीघे जमीन पर कब्जा का प्रकरण पिछले वर्ष मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचा था। शासन स्तर पर आवास एवं शहरी नियोजन विभाग के सचिव बलकार सिंह, आइजी प्रयागराज अजय कुमार मिश्र व एडीएम प्रशासन रायबरेली सिद्धांत कुमार की एसआइटी गठित की गई थी।

स्थानीय स्तर पर डीसीपी नगर, एडीएम वित्त एवं राजस्व, पीडीए सचिव एडीसीपी, डिप्टी कलेक्टर, तहसीलदार व एसीपी धूमनगंज की भी जांच कमेटी बनाई गई थी। एसआइटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर माफिया अतीक अहमद व अशरफ के करीबियों, रिश्तेदारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराकर उन्हें जेल भेज दिया गया, जिन्हें भूमाफिया भी घोषित किया जा चुका है।

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