जल जीवन मिशन में कार्यदाई संस्था के द्वारा श्रमिकों का शोषण , शोषण के विरूद्ध कर्मचारियों में आक्रोश व्याप्त

गुरुवार से अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन का आगाज

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संतोष कुमार गुप्ता (संवाददाता) 

बीजपुर /सोनभद्र-

भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन के झीलों बिजपुर परियोजना पर कार्यदाई एजेंसी GVPR द्वारा श्रमिकों के शोषण की सारी सीमाएं पार कर दिया गया है। जिसके चलते सालों से शोषित कर्मचारियो का एजेंसी के प्रति आक्रोश व्याप्त है। बतातें चलें कि गुरुवार से कर्मचारियों ने कार्यरत एजेंसी के खिलाफ खम्हरिया स्थित WTP में विशेष रूप से धरना प्रदर्शन कर अनिश्चितकाल तक कार्य बंद करने का आगाज कर दिया है।

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कार्यरत कर्मचारियों ने प्रदर्शन की सूचना बुधवार को ही परियोजना के सर्वोच्च अधिकारी (PM) प्रहलाद कुमार को उनके म्योरपुर कार्यालय पर ज्ञापन सौंपकर अवगत कराया कि एजेंसी के द्वारा स्थानीय कर्मचारियों के साथ हो रहे शोषण से निजात दिलाने का मौखिक अनुरोध भी किया है। युवाओं के चहेते स्थानीय नेता व ब्लॉक प्रमुख मानसिंह गोंड को भी कर्मचारियों ने लिखित शिकायती पत्र देकर अपने अधिकारों के हो रहे शोषण से मुक्त करने का अनुरोध किया है। जिसमे ब्लॉक प्रमुख ने श्रमिकों से वादा किया वे स्वयं धरना प्रदर्शन स्थल पर पहुंच कर दोनों पक्षों से बात कर शोषण करने वाले को चिन्हित कर कार्रवाई कराएंगे।

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इस बीच आक्रोशित कर्मचारियों ने बताया कि वे लोग प्रति दिन 12 घंटे बिना साप्ताहिक अवकाश व महीने में 30 दिन काम करते हैं तथा उन्हें पारिश्रमिक के रूप में 7500 से ले कर 12000 रुपए स्किल्ड योग्यता रखने वाले कर्मचारियों को दिया जाता है जो कि मनरेगा की मजदूरी से भी बेहद कम है।

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इस दौरान परियोजना के जिम्मेदार पद पर आशिन प्रोजेक्ट मैनेंजर ने साफ शब्दों में कहा कि मेरे कंपनी का यही नियम है यदि आपको ज्यादा वेतन चाहिए तो आप लोग ड्यूटी छोड़ दो जिस पर आक्रोशित कर्मचारियों ने अपनी आवाज बुलंद करते हुए अपनी हक मांगा जिस पर पीएम के पसीने छूट गए और हेड ऑफिस में बात कर निर्णय लेने की बातें कही।

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