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गुरुग्राम में चार वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त
हरियाणा के डीजीपी से जवाब तलब
ब्यूरो प्रयागराज। हरियाणा में चार साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाई है। शीर्ष अदालत ने सीबीआई- स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) की जांच कराए जाने की मांग वाली याचिका पर हरियाणा सरकार और राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने गुरुग्राम के पुलिस आयुक्त (सीपी) और मामले की जांच कर रहे अधिकारी (आईओ) को मामले के सभी रिकॉर्ड के साथ 25 मार्च को अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने बच्ची से दुष्कर्म के मामले में हरियाणा पुलिस की जांच से भी नाराजगी जाहिर की और इस पर हैरानी जताई। हरियाणा के एडवोकेट जनरल को राज्य में कार्यरत महिला आईपीएस अधिकारियों के नाम सुझाने का भी निर्देश दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि बच्ची के माता-पिता द्वारा दायर हलफनामे से पता चलता है कि पीड़ित से न्यायालय में जिस तरह से पूछताछ की गई, वह भी बेहद परेशान करने वाली है।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की पीठ ने बच्ची के माता-पिता द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश दिए। याचिका में सीबीआई से जांच की मांग की गई है और हरियाणा पुलिस की जांच पर सवाल उठाए।
पीड़िता के माता-पिता की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने अदालत को बताया कि मामले की जांच कर रहे अधिकारियों द्वारा पीड़िता माता-पिता को एफआईआर वापस लेने के लिए मजबूर किया गया। उन्होंने ये भी कहा कि जब मजिस्ट्रेट ने बच्ची के बयान दर्ज किए तो उस वक्त आरोपी भी अदालत के वेटिंग रूम में मौजूद थे, जबकि कानून आरोपी को पीड़िता के इतने करीब आने की इजाजत नहीं देता।
मजिस्ट्रेट ने 3 साल की रेप पीड़िता बच्ची से कहा- 'सच बोलो', सुप्रीम कोर्ट नाराज सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम में तीन साल की बच्ची के साथ कथित दुष्कर्म मामले की जांच को लेकर हरियाणा पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराज़गी जताई है. अदालत ने जांच के तरीके को ‘बेहद चौंकाने वाला’ और ‘असंवेदनशील’ करार देते हुए कई गंभीर सवाल उठाए हैं.
सोमवार हुई सुनवाई में कोर्ट ने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि पीड़िता का बयान न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने आरोपियों के बेहद करीब बैठाकर दर्ज किया गया. अदालत ने इसे प्रक्रिया के खिलाफ बताते हुए कहा कि ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और कानूनी प्रोटोकॉल का पालन अनिवार्य है.यह मामला चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जॉयमाला बागजी और विपुल पंचोली की पीठ के सामने सुनवाई के लिए आया. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने गुरुग्राम के पुलिस आयुक्त और जांच अधिकारी को 25 मार्च को पर्सनली पेश होने का निर्देश दिया है
का जांच अधिकारी (IO) पहले भी पॉक्सो (POCSO) केस में रिश्वत लेने के आरोप में सस्पेंड हो चुका है और इस केस में भी परिवार को मामला आगे न बढ़ाने की सलाह दी गई. उन्होंने कोर्ट से मांग की कि गुरुग्राम पुलिस को जांच से हटाकर मामला या तो CBI को सौंपा जाए या विशेष जांच दल (SIT) गठित किया जाए.
इस पर कोर्ट ने भी सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि ‘चार साल की बच्ची के साथ इस तरह की असंवेदनशीलता बेहद चौंकाने वाली है.’ अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में शिकायत का इंतजार किए बिना भी एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए थी.
राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि शुरुआत में महिला अधिकारी जांच कर रही थी, लेकिन उसके निलंबन के बाद एसएचओ ने जांच संभाली. हालांकि कोर्ट ने जांच प्रक्रिया में हुई खामियों पर असंतोष जताते हुए मामले में विस्तृत हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए हैं.
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