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बेसमेंट में चल रहे अस्पताल, खामोश प्रशासन
बस्ती मंडल की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल
बस्ती। बस्ती मंडल में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े हो गए हैं। शहर और आसपास के इलाकों में कई नर्सिंग होम, अस्पताल और डायग्नोस्टिक सेंटर कथित रूप से बेसमेंट में संचालित हो रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग मानो “निरों की तरह बंसी बजा” रहा हो। आम जनमानस और पत्रकारों की बार-बार उठती आवाज़ के बावजूद मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय की चुप्पी कई तरह की आशंकाओं को जन्म दे रही है जानकारों का कहना है कि बेसमेंट में अस्पताल या नर्सिंग होम चलाना सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के लिहाज से बेहद खतरनाक है। आपातकाल की स्थिति में मरीजों को बाहर निकालना कठिन हो सकता है।
इसके बावजूद बस्ती और आसपास के जिलों में कई निजी स्वास्थ्य संस्थान कथित रूप से इसी व्यवस्था में संचालित हो रहे हैं। सवाल यह है कि जब यह सब खुलेआम हो रहा है तो स्वास्थ्य विभाग की निगरानी कहां है।स्थानीय लोगों का आरोप है कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी और उनकी टीम को इन व्यवस्थाओं की पूरी जानकारी है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई जाती है। यदि इस मामले में जवाबदेही तय की जाए तो प्रशासनिक स्तर पर जिम्मेदारी जिलाधिकारी तक भी जाती है, क्योंकि जिले में किसी भी अवैध या असुरक्षित गतिविधि को रोकना जिला प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है।
कुछ लोग यह भी कहते हैं कि यदि किसी अधिकारी से पूछा जाए तो वह यह कहकर बच निकलता है कि “हमें इसकी जानकारी नहीं थी।” लेकिन यह तर्क भी कई सवाल खड़े करता है—क्या पूरे जिले में चल रहे अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटरों की निगरानी का कोई ठोस तंत्र नहीं है?इस मुद्दे को और गंभीर बनाता है वह उदाहरण, जब राजधानी दिल्ली में बेसमेंट में चल रहे संस्थानों में जलभराव की घटनाओं ने बड़ा संकट खड़ा कर दिया था। ऐसी परिस्थितियों में मरीजों और स्टाफ की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है। बावजूद इसके बस्ती मंडल में मानकों की अनदेखी कर अस्पतालों का संचालन होना चिंताजनक है।
बेसमेंट मे जमे मरीज और सहयोगी इसके अलावा कुछ पैथोलॉजी लैब और जांच केंद्रों पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि कई जगहों पर योग्य पैथोलॉजिस्ट की अनुपस्थिति में जांचें की जा रही हैं। कहीं नमूने एक शहर से दूसरे शहर भेजे जा रहे हैं, तो कहीं बिना मानक उपकरणों के जांच की जा रही है। इससे रिपोर्ट की विश्वसनीयता और मरीजों के उपचार दोनों पर खतरा पैदा हो सकता है।पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब भी इस मुद्दे को उठाया जाता है तो प्रभाव और पैसे के बल पर आवाज दबाने की कोशिश होती है।
आम नागरिकों के लिए सीधे उच्च स्तर तक अपनी शिकायत पहुंचाना भी आसान नहीं है।ऐसे में सवाल उठता है कि क्या स्वास्थ्य व्यवस्था केवल कागजों में ही सुरक्षित और व्यवस्थित है? यदि मानकों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?बस्ती मंडल के नागरिकों का मानना है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
बेसमेंट में संचालित सभी अस्पतालों, नर्सिंग होम और डायग्नोस्टिक सेंटरों का सर्वे कर यह सुनिश्चित किया जाए कि वे सुरक्षा और स्वास्थ्य मानकों का पालन कर रहे हैं या नहीं।स्वास्थ्य व्यवस्था सीधे आम जनता के जीवन से जुड़ी है। यदि इसी क्षेत्र में लापरवाही और अनियमितता का बोलबाला रहेगा, तो यह केवल प्रशासनिक विफलता नहीं बल्कि जनस्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ माना जाएगा। अब सबसे बड़ा सवाल यही है क्या बस्ती मंडल की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने के लिए सख्त कार्रवाई होगी, या फिर यह मुद्दा भी फाइलों में दब कर रह जाएगा?
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