खजनी थाने का प्रेस नोट विवाद में: गलत तारीख, दो नाम, एक ही आरोपी और ‘बुरा न मानो होली है’ का संदेश

क्षेत्रीय पत्रकारों में में प्रेस नोट की चर्चा , होली का मजाक बना ख़जनी का प्रेस नोट

शत्रुघन मणि त्रिपाठी  Picture
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रिपोर्टर/ रामअशीष तिवारी ( खजनी तहसील)

ख़जनी' गोरखपुर, 2 मार्च 2026: जनपद के खजनी थाने से जारी एक प्रेस नोट इन दिनों सोशल मीडिया और पत्रकारों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। थाना प्रभारी जयंत कुमार सिंह द्वारा जारी इस नोट में तारीख, आरोपी के नाम और भाषा शैली—तीनों में इतनी गड़बड़ियां हैं कि सवाल उठना लाजमी हो गया है। प्रेस नोट पर अंकित तारीख है—1-3-2025। जबकि आज 2 मार्च 2026 है। यानी थाना प्रभारी ने पूरे एक साल पुरानी तारीख डाल दी। क्या यह महज टाइपिंग की चूक है या दस्तावेज तैयार करने में लापरवाही?

सबसे हैरान करने वाली बात आरोपी के नाम की है। नोट के एक हिस्से में लिखा गया है—जगदंबा शुक्ला पुत्र रामसूरत शुक्ला, निवासी डांगी पार, थाना बांसगांव” जबकि उसी नोट में आगे लिखा है— विकास पुत्र खदेरु, निवासी ग्राम परसौनी, थाना गजनी”दो अलग-अलग नाम, दो अलग-अलग पते, एक ही प्रेस नोट में। अब सवाल यह है कि असली आरोपी कौन है? क्या पुलिस खुद नहीं जानती या फिर जानबूझकर भ्रम पैदा करने की कोशिश की गई?

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*“बुरा न मानो होली है!” होली के त्योहार में यह वाक्य आम बोलचाल में इस्तेमाल होता है, लेकिन आधिकारिक पुलिस प्रेस नोट में इसका इस्तेमाल कई सवाल खड़े कर रहा है। क्या सरकारी दस्तावेज में इतनी अनौपचारिक भाषा उचित है?

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स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि पुलिस का प्रेस नोट तथ्यों पर आधारित, स्पष्ट और सुसंगत होना चाहिए। जब खुद पुलिस की जारी सूचना में नाम, पता और तारीख तक गलत हो, तो आम जनता को सही जानकारी कैसे मिलेगी?
अभी तक खजनी थाने या वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से इस गड़बड़ी पर कोई स्पष्टीकरण नहीं आया है।

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 देखना यह होगा कि इस ‘लाजवाब’ प्रेस नोट को महज टाइपिंग एरर मानकर सुधार लिया जाएगा या फिर जिम्मेदारी तय की जाएगी। फिलहाल, खजनी थाने का यह प्रेस नोट गोरखपुर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़ा कर रहा है।

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