झारखंड में पहली बार जंगली हाथी का हुआ सफल इन-हाउस उपचार

पलामू टाइगर रिजर्व ने रचा इतिहास

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लातेहार, झारखंड:- झारखंड के वन्यजीव संरक्षण इतिहास में एक नई उपलब्धि जुड़ गई है। पलामू टाइगर रिजर्व की विशेष रेस्क्यू एवं वेटनरी प्रबंधन इकाई ने एक वयस्क नर एशियाई जंगली हाथी का पूरी तरह इन-हाउस क्षमता के साथ सफल ट्रेंकुलाइजेशन और उपचार कर राज्य में पहली बार यह कारनामा कर दिखाया है। इसे झारखंड में वन विभाग द्वारा स्वदेशी संसाधनों से जंगली हाथी के उपचार का पहला सफल मामला माना जा रहा है।
 
जानकारी के अनुसार 18 फरवरी 2026 को बेतला राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में एक वयस्क नर हाथी असामान्य रूप से चलते हुए देखा गया। फील्ड ट्रैकिंग और व्यवहारिक अवलोकन के दौरान उसके दाहिने अग्रपाद में सतही घाव पाया गया, जिससे वह लंगड़ाकर चल रहा था और स्पष्ट रूप से असुविधा में था।
 
  ■ पाँच दिनों तक चली रणनीतिक निगरानी: 
घने जंगल, झाड़ीदार भूभाग और सीमित दृश्यता के कारण ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। रेस्क्यू टीम ने लगातार पाँच दिनों तक हाथी की गतिविधियों, भोजन स्थलों और माइक्रो-हैबिटैट का सूक्ष्म अध्ययन कर सुरक्षित ऑपरेशन विंडो तय की। इसके बाद 26 फरवरी को केमिकल इम्मोबिलाइजेशन तकनीक के माध्यम से हाथी को सुरक्षित रूप से ट्रेंकुलाइज किया गया।
 
  ■ वैज्ञानिक प्रोटोकॉल के तहत हुआ उपचार
विशेषज्ञ टीम ने ट्रेंकुलाइजेशन के बाद हाथी का व्यापक उपचार किया, जिसमें घाव का क्लीनिकल एवं फॉरेंसिक परीक्षण, एंटीसेप्टिक वाउंड क्लीनिंग और डिब्राइडमेंट, एंटीबायोटिक, दर्द निवारक व एंटी-इन्फ्लेमेटरी दवाओं का उपयोग तथा फ्लुइड सपोर्ट सहित अन्य सहायक चिकित्सीय प्रक्रियाएँ शामिल थीं। उपचार के उपरांत हाथी के सभी जीवन-चिह्न सामान्य पाए गए और उसे सुरक्षित रिकवरी अवस्था में लाया गया। फिलहाल हाथी की स्थिति स्थिर है और वह निरंतर निगरानी में है।
 
  ■ कुमकी हाथियों की रही अहम भूमिका:
ऑपरेशन के दौरान प्रशिक्षित पालतू (कुमकी) हाथियों की सहायता से लक्ष्य हाथी तक सुरक्षित पहुँच बनाई गई। इससे ट्रैकिंग और उपचार प्रक्रिया को सुचारु रूप से अंजाम देने में बड़ी मदद मिली।
 
  ■ विशेषज्ञों की संयुक्त टीम ने निभाई जिम्मेदारी:
अभियान का नेतृत्व पलामू टाइगर रिजर्व (उत्तरी) के उपनिदेशक प्रजेश जेना (IFS) के मार्गदर्शन में किया गया। बेतला रेंज के वन क्षेत्र पदाधिकारी उमेश दुबे, वेटरनरी डॉक्टर सुनील कुमार एवं पुरुषोत्तम कुमार, फील्ड बायोलॉजिस्ट तथा रेस्क्यू और महावत टीम के सदस्यों ने सामूहिक रूप से इस मिशन को सफल बनाया।
 
■ वन्यजीव प्रबंधन में मील का पत्थर: 
यह सफलता झारखंड में वन्यजीव चिकित्सा, आपातकालीन रेस्क्यू क्षमता और तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ी संस्थागत उपलब्धि मानी जा रही है। अब पलामू टाइगर रिजर्व की टीम जटिल वन्यजीव उपचार कार्य स्वतंत्र रूप से करने के साथ-साथ राज्य के अन्य वन प्रभागों को भी तकनीकी सहयोग देने में सक्षम होगी।
यह अभियान मानव-हाथी संघर्ष प्रबंधन, वन्यजीव स्वास्थ्य सुरक्षा और सामुदायिक संरक्षण व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ है।

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