राष्ट्रीय संगोष्ठी में कई पंथों के साधु संतों ने अपने विचार व्यक्त किए

Swatantra Prabhat Desk Picture
Published On

नैनी, प्रयागराज। दिनों दिन बढ़ता बाल भिक्षावृत्ति पेशा, देश के भविष्य को अंधेरे में धकेलता जा रहा है। भारत सरकार द्वारा बनाए गए बाल भिक्षावृत्ति उन्मूलन कानून का पालन कराने को सौंपी गई जिम्मेदारी का निर्वहन करने में प्रशासनिक अधिकारी अभी तक विफल साबित हुए हैं। उक्त बातें नागा संत शिरोमणि दामोदर दास महाराज ने बाल भिक्षावृत्ति उन्मूलन राष्ट्रीय संगोष्ठी में संत समाज के समक्ष कहीं। संत समाज ने उनकी बातों का समर्थन किया। सबने मिलकर इस प्रथा को समाप्त करने का संकल्प लिया।
 
मंगलवार को माघ मेला में संगम अपर मार्ग पर महावीर चौराहा स्थित सेक्टर एक स्थित नागा संत शिरोमणि सती अनुसुइया आश्रम चित्रकूट धाम के शिविर में भौमा अमावस्या पर बाल भिक्षावृत्ति उन्मूलन संगोष्ठी आयोजित की गई। राष्ट्रीय संगोष्ठी में कई पंथों के साधु संतों ने अपने विचार व्यक्त किए। संगोष्ठी की अध्यक्षता नागा संत दामोदरदास महाराज ने  की। उन्होंने कहा कि भारत में इस्लामिक गतिविधियां संचालित करने वालों को देश से निकलने का काम साधु संत करेंगे। कहा कि भारत में बाल भिक्षावृत्ति अभिशाप बना हुआ है।
 
इसके उन्मूलन को भारत सरकार द्वारा कानून बनाया गया है। उसका पालन नहीं हो रहा है। हम साधु संतों को एक होकर भारत के उज्जवल भविष्य को बचाना है। बिना साधु संतों के सनातन धर्म की अगुवाई करने से  यह पूर्ण रूप से बंद नहीं होगा। परिवर्तन संस्था के प्रदेश अध्यक्ष मोनू गुप्ता ने कहा कि आज हम लोग अपने बच्चों को पढ़ने लिखने के लिए अच्छी शिक्षा देने का कार्य करते हैं। अगर हम लोग बच्चों का भविष्य बदलने का संकल्प लें तो भारत से बाल भिक्षावृत्ति पूर्ण रूप से बंद होगी। हम लोगों के सामूहिक प्रयास और जन जागरूकता से ही इस श्राप से मुक्ति मिलेगी।
 
संगोष्ठी के बाद माघ महोत्सव विदाई समारोह और भंडारा प्रसाद वितरण किया गया। समापन पर पूज्य संत दामोदर दास महाराज ने कहा कि माघ मेला एक महीने का होता है। साधु संत आते हैं लेकिन कभी भी सामूहिक प्रयास नहीं करते हैं कि मां गंगा को प्रदूषण मुक्त और बाल भिक्षा को समूल रूप से खत्म किया जाए। सामूहिक प्रयास करना अति आवश्यक है। संगोष्ठी में देवेंद्र दास, ओम दास, राघव दास, महावीर दास, गोविंद दास, गणेश दास, कैलाश दास, रघुनाथ दास, ज्योतिषी गोवर्धन दास, हरिदास, कृष्ण मोहन, राधा गोविंद, ज्ञान दास आदि विद्वत संत समाज उपस्थित रहा।

About The Author

Post Comments

Comments

संबंधित खबरें

नवीनतम समाचार