जमींदार तरुण साहू द्वारा प्लॉट संख्या 551 पर जबरन कब्जे की कोशिश का आरोप 

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पाकुड़िया–पाकुड़, झारखंड:- पाकुड़िया प्रखंड मुख्यालय स्थित निजी तालाब ‘बांधा पोखर’ के मालिक तरुण साहू और उनके पुत्र अभिजीत साहू पर वरिष्ठ पत्रकार मदन प्रसाद भगत की निजी भूमि प्लॉट संख्या 551 पर जबरन कब्जा करने की बार-बार कोशिश करने का गंभीर आरोप लगा है। बताया जाता है कि साहू पिता-पुत्र बीते अगस्त माह से अब तक करीब छह बार इस भूमि पर कब्जा करने का प्रयास कर चुके हैं।
 
■ अस्थायी घेराबंदी कर पौधरोपण, फिर खुद ही किया नष्ट: 
आरोप है कि अगस्त महीने में तरुण साहू ने 14 धूर खाली पड़ी भूमि को अपना बताते हुए अस्थायी घेराबंदी की और वहां फूलों के पौधे लगवाए। बाद में उन्होंने खुद ही घेराबंदी तोड़कर सभी पौधों को नष्ट कर दिया। विरोध करने पर पत्रकार मदन प्रसाद भगत को धक्का देने की भी बात सामने आई है।
 
■ कागजात दिखाने के बावजूद नहीं माने साहू पिता-पुत्र: 
मदन प्रसाद भगत के अनुसार उन्होंने अंचल कार्यालय का पंजी–2 तथा निबंधन कार्यालय से प्राप्त सभी वैध कागजात साहू पिता–पुत्र को दिखाए, परंतु वे किसी भी दस्तावेज को मानने को तैयार नहीं हुए। मौके पर मौजूद लोगों ने भी सलाह दी कि जिसके पास वैध सरकारी कागजात हैं, भूमि उसी की मानी जाएगी।
 
■ उल्टा थाने में शिकायत, पर कागजात निकले शून्य: 
कुछ दिनों बाद तरुण साहू और उनके पुत्र अभिजीत ने पाकुड़िया थाना प्रभारी को आवेदन देकर आरोप लगाया कि मदन प्रसाद भगत तालाब जाने वाली सड़क पर घेराबंदी कर रहे हैं। थाना प्रभारी द्वारा पूछताछ में जब दोनों से कागजात मांगे गए, तो उन्होंने लिखित रूप से स्वीकार किया कि उनके पास कोई सरकारी प्रमाण नहीं है।
 
■ भूमि मापी में भगत के दावे की पुष्टि:
थाना प्रभारी के निर्देश पर सरकारी अमीन से 10 जनवरी को भूमि की मापी कराई गई। मापी के बाद विवादित भूमि को वैध कागजात के आधार पर मदन प्रसाद भगत का पाया गया, जिसके बाद उन्होंने पुनः घेराबंदी कर ली।
 
फिर भी कब्जे का प्रयास, प्रभावशाली लोगों के हस्ताक्षर जुटाए:-
आरोप है कि इसके बाद भी साहू पिता–पुत्र अपनी जमींदारी मानसिकता से पीछे नहीं हटे और कई स्थानीय प्रभावशाली तथा विवादित गतिविधियों में लिप्त लोगों से हस्ताक्षर कराकर अंचल कार्यालय में आवेदन देकर भूमि पर कब्जे की कोशिश करते रहे।
 
■ अंचल कार्यालय की स्पष्ट रिपोर्ट:--
पाकुड़िया अंचल कार्यालय ने कई बार स्पष्ट किया है कि प्लॉट संख्या 551 में दर्ज 1 कट्ठा 16 धूर भूमि मदन प्रसाद भगत के नाम वैध रूप से दर्ज है, जबकि प्लॉट संख्या 552/1089 की 1 कट्ठा 4 धूर भूमि सरकारी सड़क के रूप में अभिलेखित है, और तरुण साहू के पास न तो प्लॉट 551 से संबंधित कोई वैध रसीद या कागजात हैं और न ही तालाब की ओर जाने वाली किसी सड़क का कोई प्रमाण उपलब्ध है।
 
■ स्थानीय लोगों में नाराजगी:
स्थानीय लोगों ने भी भूमि रिकॉर्ड देखने के बाद स्पष्ट किया कि 14 धूर खाली पड़ी जमीन मदन प्रसाद भगत की है तथा उनका पक्का मकान 1 कट्ठा 4 धूर में स्थित है। लोगों का कहना है कि वैध कागजात होते हुए भी किसी निजी भूमि पर कब्जा करने की ऐसी कोशिशें निंदनीय और अमर्यादित हैं।

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