बलिया में फिल्म के नाम को लेकर विरोध, ‘घूसखोरी पंडित’ को बैन करने की उठी मांग

विरोध प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि किसी भी समाज या वर्ग को निशाना बनाकर फिल्म बनाना निंदनीय है और इससे सामाजिक सौहार्द प्रभावित होता है।

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बलिया में प्रस्तावित फिल्म “घूसखोर पंडत” के नाम को लेकर लोगों में तीखा आक्रोश देखने को मिला। शहर के कदम चौराहा स्थित छोटी मठिया पर बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए और फिल्म के शीर्षक को समाज विशेष की छवि धूमिल करने वाला बताते हुए विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से फिल्म पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग की।
 
विरोध प्रदर्शन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि किसी भी समाज या वर्ग को निशाना बनाकर फिल्म बनाना निंदनीय है और इससे सामाजिक सौहार्द प्रभावित होता है। पूर्व बैंक कर्मचारी अशोक मिश्रा ने कहा कि इस तरह की फिल्में समाज में वैमनस्य फैलाने का कार्य करती हैं, इसलिए सरकार को बिना देर किए इस पर रोक लगानी चाहिए।
 
श्याम सुंदर चौबे ने कहा कि किसी भी समाज या वर्ग की छवि खराब करने का अधिकार बॉलीवुड को किसी ने नहीं दिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किस उद्देश्य और भावना से फिल्म का नाम किसी समाज विशेष को बदनाम करने के लिए रखा गया है।
 
इसी क्रम में पंडित अवनींद्र चतुर्वेदी ने कहा कि ऐसे शीर्षक वाली फिल्मों से आने वाली पीढ़ियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा और जातीय द्वेष को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने सरकार से मांग की कि ऐसी फिल्मों पर कड़ी निगरानी रखी जाए और आवश्यकता पड़ने पर इन्हें प्रतिबंधित किया जाए।
 
पंडित जितेंद्र चतुर्वेदी ने फिल्म के निर्माता से ब्राह्मण समाज से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और फिल्म को तत्काल बैन करने की मांग उठाई। विरोध प्रदर्शन में बृजेश पांडे, दीपक तिवारी, अजीत पांडे, ईलू पांडे, अखिलेश तिवारी, मनीष चतुर्वेदी, राकेश विक्रम सिंह, रजनीश उपाध्याय, पशुपति गुप्ता सहित अनेक लोगों ने एक स्वर में फिल्म के खिलाफ सहमति जताई।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि इस मामले में शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

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