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ओबरा में श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह की सजीव झांकी देख भाव-विभोर हुए श्रद्धालु, जयकारों से गूंजा पांडाल
व्यास माधवाचार्य पं. महेशदेव पांडेय जी ने कथा का रसपान कराते हुए कहा कि रुक्मिणी जी साक्षात लक्ष्मी स्वरूपा हैं ।
अजित सिंह ( ब्यूरो) के साथ कु. रीता की रिपोर्ट
ओबरा के श्री राम नगर स्थित ॐ श्री सदाशिव महादेव मंदिर प्रांगण में चल रहे श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ महोत्सव के छठवें दिन शनिवार को भक्ति का सागर उमड़ पड़ा। भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी के विवाह प्रसंग ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। ढोल-नगाड़ों की थाप और फूलों की वर्षा के बीच पूरा क्षेत्र जय श्री कृष्ण के जयकारों से गुंजायमान रहा। कथा व्यास माधवाचार्य पं. महेशदेव पांडेय जी ने कथा का रसपान कराते हुए कहा कि रुक्मिणी जी साक्षात लक्ष्मी स्वरूपा हैं और भगवान श्रीकृष्ण नारायण हैं।

उन्होंने बताया कि रुक्मिणी-कृष्ण विवाह केवल एक पौराणिक घटना नहीं, बल्कि जीवात्मा का परमात्मा से मिलन का प्रतीक है।व्यास जी ने महारास, मथुरा गमन और रुक्मिणी हरण के प्रसंगों का सजीव चित्रण किया। विशेष रूप से रुक्मिणी जी द्वारा भगवान को लिखे गए सात श्लोकों के प्रेम पत्र का वर्णन सुनकर पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भावुक हो उठे। उन्होंने समझाया कि जब भक्त सच्चे मन से पुकारता है, तो भगवान स्वयं उसे अपनाने के लिए दौड़े चले आते हैं। विवाह प्रसंग के दौरान जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मिणी की सजीव झांकी सामने आई, श्रद्धालु भक्ति में झूमने लगे।
मुख्य यजमान पं. प्रमोद चौबे और उनकी धर्मपत्नी ने कन्यादान की रस्म पूरी कर द्वारकाधीश का पूजन किया। महिला श्रद्धालुओं ने मंगल गीत गाकर उत्सव की शोभा बढ़ाई। पूरे पंडाल में फूलों की वर्षा की गई और भक्तों ने नृत्य कर अपनी खुशी जाहिर की। प्रात: कालीन बेला में भगवान की शोभायात्रा ओबरा नगर के विभिन्न क्षेत्रों में निकाली गई।
ॐ श्री सदाशिव परिवार और श्री राधा रानी की टोली गीता मंदिर, शीतला माता मंदिर, हनुमान मंदिर, राम जानकी मंदिर और गायत्री मंदिर होते हुए वापस मुख्य मंदिर पहुंची। रास्ते भर श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन किए और महिलाएं भक्ति भाव में नृत्य करती नजर आईं।कथा के अंत में आरती और प्रसाद वितरण किया गया। व्यास जी ने बताया कि रविवार को कथा का विश्राम दिवस होगा, जिसमें मित्रता की मिसाल पेश करने वाले सुदामा चरित्र का मार्मिक वर्णन किया जाएगा।

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