अमेरिकी दबाव के बीच भारतीय बजट की बड़ी परीक्षा

[टैरिफ़ युग में भारत की नई आर्थिक रेखा] [आर्थिक चक्रव्यूह में भारत: क्या बजट 2026 निकालेगा मार्ग]

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प्रो. आरके जैन “अरिजीत”

भारतीय अर्थव्यवस्था इस समय इतिहास के एक ऐसे निर्णायक मोड़ पर खड़ी दिखाई देती हैजहां वैश्विक राजनीतिव्यापारिक नीतियां और राष्ट्रीय हित आपस में गहराई से उलझ गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए आक्रामक टैरिफ़ ने विश्व व्यापार व्यवस्था की स्थिरता को चुनौती दी है। अगस्त 2025 में भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ़ केवल शुल्क वृद्धि नहींबल्कि एक स्पष्ट राजनीतिक और आर्थिक संदेश हैं। इस पृष्ठभूमि में बजट 2026 साधारण वार्षिक प्रक्रिया न रहकर भारत की आर्थिक दिशा तय करने वाला ऐतिहासिक दस्तावेज बनने की ओर बढ़ रहा है।

ट्रंप टैरिफ़ का प्रभाव भारतीय निर्यात के लिए गहरी चिंता का विषय बन चुका है। उपभोक्ता वस्तुएंवस्त्ररसायनऑटो कलपुर्जे और खुदरा उत्पाद जैसे क्षेत्र सीधे तौर पर इन शुल्कों की मार झेल रहे हैं। बढ़ी हुई लागत के कारण भारतीय उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धा खो सकते हैं। यह स्थिति केवल व्यापार घाटे तक सीमित नहीं रहतीबल्कि उत्पादनरोजगार और निवेश पर भी नकारात्मक असर डालने की क्षमता रखती है। ऐसे में बजट 2026 से अपेक्षा है कि वह इस दबाव को अवसर में बदलने की स्पष्ट रणनीति प्रस्तुत करे।

वैश्विक स्तर पर ट्रंप टैरिफ़ संरक्षणवाद की उस नई लहर का प्रतीक हैंजिसमें मुक्त व्यापार की अवधारणा धीरे-धीरे पीछे हटती दिख रही है। अमेरिका अपने घरेलू उद्योगों को प्राथमिकता देकर अंतरराष्ट्रीय नियमों को पुनर्परिभाषित कर रहा है। भारत के लिए यह संकेत स्पष्ट है कि अब केवल पारंपरिक व्यापार साझेदारों पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। बजट 2026 के माध्यम से भारत को यह संदेश देना होगा कि वह बदलती वैश्विक व्यवस्था में केवल अनुकूलन ही नहींबल्कि नेतृत्व करने की क्षमता भी रखता है।

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निर्यात विविधीकरण इस पूरे विमर्श का सबसे मजबूत स्तंभ बनकर उभरता है। वर्षों से भारतीय निर्यात कुछ सीमित बाजारों पर केंद्रित रहा हैजिससे किसी एक झटके का असर व्यापक हो जाता है। ट्रंप टैरिफ़ ने इसी कमजोरी को उजागर किया है। अफ्रीकालैटिन अमेरिकापश्चिम एशिया और यूरोप के उभरते बाजार भारत के लिए नए अवसर प्रस्तुत करते हैं। बजट 2026 में यदि विशेष निर्यात प्रोत्साहनबाजार-विशेष रणनीतियां और लॉजिस्टिक समर्थन शामिल किए जाते हैंतो भारतीय निर्यात नई दिशा पकड़ सकता है।

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टैरिफ़ का प्रभाव रोजगार पर भी गहरा पड़ सकता है। निर्यात आधारित उद्योगों में मांग घटने से उत्पादन में कटौती और नौकरियों में कमी का खतरा बढ़ गया है। छोटे और मध्यम उद्योगजो पहले से ही सीमित संसाधनों पर निर्भर हैंसबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि भारत की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से घरेलू मांग पर आधारित हैफिर भी निर्यात क्षेत्र लाखों लोगों को रोजगार प्रदान करता है। बजट 2026 में रोजगार संरक्षण और सृजन के लिए लक्षित उपाय इस चुनौती का प्रभाव कम कर सकते हैं।

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के लिए यह बजट केवल वित्तीय संतुलन साधने का अभ्यास नहींबल्कि आर्थिक आत्मरक्षा की रणनीति गढ़ने का अवसर है। नीति विशेषज्ञों की राय है कि गैर-टैरिफ़ बाधाओं को हटानानियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाना और नीति स्थिरता सुनिश्चित करना समय की सबसे बड़ी मांग है। विदेशी प्रत्यक्ष निवेश को आकर्षित करने के लिए स्पष्ट नियम और तेज निर्णय प्रक्रिया आवश्यक है। बजट 2026 यदि इस दिशा में ठोस संकेत देता हैतो भारत वैश्विक निवेश मानचित्र पर और मजबूत स्थिति बना सकता है।

घरेलू मांग को सशक्त बनाना ट्रंप टैरिफ़ के प्रभाव को कम करने का सबसे प्रभावी उपाय माना जा रहा है। जब देश का आंतरिक बाजार मजबूत होता हैतब बाहरी झटके सीमित प्रभाव डाल पाते हैं। मध्यम वर्ग की क्रय शक्ति बढ़ाने के लिए आयकर राहतउपभोग को बढ़ावा देने वाले कदम और अप्रत्यक्ष कर सुधार बजट 2026 की प्राथमिकताओं में शामिल हो सकते हैं। इससे न केवल खपत बढ़ेगीबल्कि उद्योगों को स्थिर और विश्वसनीय मांग का आधार भी मिलेगा।

उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजनाएं इस रणनीति की केंद्रीय धुरी बन सकती हैं। घरेलू विनिर्माण को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप बनाने के लिए तकनीकपूंजी और नवाचार का संगठित विकास आवश्यक है। बजट 2026 में इन योजनाओं के विस्तार से आयात निर्भरता घटेगी और घरेलू उत्पादन को नई गति मिलेगी। इससे भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में केवल उपभोक्ता नहींबल्कि प्रभावशाली उत्पादक की भूमिका निभा सकेगा।

ऊर्जा आयात और कच्चे माल की निर्भरता भी ट्रंप टैरिफ़ के संदर्भ में एक संवेदनशील मुद्दा है। रूसी तेल आयात को लेकर अमेरिकी आपत्तियों ने भारत के सामने कूटनीतिक और आर्थिक संतुलन की चुनौती खड़ी कर दी है। संकेत मिले हैं कि आयात नीति में समायोजन से शुल्क राहत संभव हो सकती है। बजट 2026 में ऊर्जा स्रोतों के विविधीकरण और आत्मनिर्भर ऊर्जा नीति पर जोर देकर भारत अपने दीर्घकालिक हितों की रक्षा कर सकता है।

आधारभूत संरचना में निवेश किसी भी आर्थिक रणनीति की रीढ़ होता है। सड़करेलबंदरगाहऊर्जा और डिजिटल ढांचे में निवेश से उत्पादकता बढ़ती है और रोजगार के अवसर पैदा होते हैं। बजट 2026 में यदि इन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गयातो यह न केवल तात्कालिक आर्थिक गतिविधियों को गति देगाबल्कि दीर्घकालिक विकास को भी मजबूती प्रदान करेगा। यह निवेश भारत को वैश्विक अनिश्चितताओं से सुरक्षित रखने में सहायक होगा।

शिक्षा और कौशल विकास पर खर्च भी इस बजट का एक महत्वपूर्ण आयाम हो सकता है। बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में वही देश टिकाऊ प्रगति करते हैंजिनके पास कुशल और अनुकूलनशील मानव संसाधन होता है। बजट 2026 में नई तकनीकोंडिजिटल कौशल और नवाचार को बढ़ावा देने वाले प्रावधान भारत के युवाओं को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार कर सकते हैं। यह निवेश भविष्य की आर्थिक सुरक्षा का मजबूत आधार बनेगा।

बजट 2026 ट्रंप टैरिफ़ से उत्पन्न दबाव को अवसर में बदलने का निर्णायक मंच साबित हो सकता है। निर्यात विविधीकरणघरेलू मांग की मजबूतीनिवेश प्रोत्साहन और संरचनात्मक सुधार मिलकर भारत को नई आर्थिक ऊंचाइयों तक ले जाने की क्षमता रखते हैं। यह बजट केवल संकट प्रबंधन का दस्तावेज नहींबल्कि आत्मनिर्भरसशक्त और वैश्विक रूप से प्रभावशाली भारत की स्पष्ट घोषणा बन सकता है। यदि बड़ेसाहसिक और दूरदर्शी ऐलान हुएतो बजट 2026 आने वाले वर्षों के लिए आर्थिक दिशा निर्धारित करने वाला ऐतिहासिक पड़ाव सिद्ध होगा।

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