सिपाहियों के कारनामे से खाकी हुई दागदार, पुलिस ने भेजा जेल

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अम्बेडकर नगर।

जब जनता की सुरक्षा की ढाल माना जाने वाला सिपाही ही लूटपाट और ठगी करने पर उतारू हो जाए तो उस देश का क्या भविष्य क्या होगा यह हर व्यक्ति आसानी से सोच और समझ सकता है। जब खाकी हो ठगों की संरक्षक बन जाए तो कानून की साख पर गंभीर सवाल खड़े हो जाते हैं। राजेसुल्तानपुर थाना क्षेत्र से सामने आया मामला पुलिस महकमे के भीतर चल रहे काले कारनामे की एक बानगी बन गया है। जहां हर व्यक्ति में सुरक्षा का पहला नाम डायल 112 का आता है। इसी डायल 112 पर तैनात दो सिपाही ठगी के खेल में सम्मिलित पाए गए।

गोरखपुर निवासी एक व्यक्ति ने को सस्ते सोने का झांसा देकर दो लाख रुपये की ठगी की गई। सौदा तय होने के बाद पीड़ित को जो बैग सौंपा गया, उसमें सोना नहीं बल्कि नकली नोट निकले। ठगी का भान होते ही पीड़ित ने जब आरोपियों को रखने के लिए पीछा किया तभी मौके पर बिना नंबर की बाइक से डायल 112 के  सिपाही आदर्श यादव और अनिल यादव नाम के दो सिपाही पहुंचे। उसके बाद दोनों सिपाहियों ने कानून का डर दिखाकर पीड़ित को ही चुप करा दिया था और ठगों को ईमानदार बताकर सुरक्षित जाने दिया।

गत दिनों 13 जनवरी 2026 को हुई वारदात के बाद पीड़ित की तहरीर पर जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी वैसे-वैसे खाकी के दोनों सिपाहियों का असल असल कारनामा सामने आता गया। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि दोनों सिपाही केवल मौके पर मौजूद ही नहीं थे, बल्कि ठगी के पूरे खेल में उनकी भूमिका संदिग्ध और सक्रिय थी। मामला जब वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा तो हड़कंप मच गया।

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अपर पुलिस अधीक्षक श्यामदेव ने पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए त्वरित जांच के आदेश दिए। जांच में आरोप प्रमाणित होने पर दोनों सिपाहियों को तत्काल निलंबित करते हुए गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। इस मामले में मुख्य आरोपी प्रमोद कुमार सिंह पहले ही जेल जा चुका है, जबकि दूसरा आरोपी वीरेंद्र वर्मा फरार है, जिसकी तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है।

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यह वारदात केवल एक ठगी का मामला ही नहीं बल्कि उस व्यवस्था पर सवाल है, जहां कुछ वर्दीधारी कानून के रक्षक नहीं, बल्कि अपराध के साझेदार बन बैठे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब सक्रिय और सख्त अधिकारियों के सर्कल में भी इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं, तो आम नागरिकों का भरोसा टूटना स्वाभाविक है। फिलहाल पुलिस प्रशासन निष्पक्ष जांच का दावा कर रहा है और यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि अपराध चाहे वर्दी में हो या बिना वर्दी, कानून की गिरफ्त से कोई नहीं बचेगा।

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