दस साल की सजा और जुर्माना के बाद भी  नौकरी  बहाल

सजायाफ्ता  पंचायत मित्र  किस आधार पर  कर रहा  नौकरी, मामला  ग्राम पंचायत पहाडापुर  विकास खंड  बीजूआ  का  बताया  जाता है

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लखीमपुर खीरी। मामला  ब्लाक बिजुआ की ग्राम पंचायत पहाडापुर का है जहां खंड विकास अधिकारी की मिलीभगत से सजायाफ्ता पंचायत मित्र सुनील कुमार  नियम कानून  से ऊपर उठ कर मलाई काट रहा है।सूत्र बताते हैं कि सुनील कुमार पर अवैध तरीके से  ,कागजो पर काम दिखाकर लाखो का खेला किये जाने के    आरोप लगाए गए हैं।
 
इतना ही नहीं पंचायत मित्र के पद पर तैनात रहकर   गोलमाल कर  अच्छी  खासी संपत्ति बनाए जाने की चर्चा जोर पकड़ती  जा रही हैं।यदि मामले की हो जाय  निष्पक्ष जांच, और आय से अधिक संपत्ति की जांच तो होगा एक बडे घोटाले का पर्दाफाश और  रहस्य का रहस्योद्घाटन भी होगा और कई अन्य लोगों पर भी आएगी जांच की आंच।
 
मिली जानकारी के अनुसार  पंचायत मित्र पर एक आपराधिक मुकदमा दर्ज हुआ था  जिसमें सुनील कुमार को दस वर्ष की सजा सुनाई गई थी।और काफी दिन तक जिला कारागार में निरुद्ध रहे थे। उक्त मामला उच्च न्यायालय लखनऊ में  पेंडिंग बताया  जाता है। सवाल यह है कि आपराधिक मामले  के आरोप मे दस साल  की सजा एव  जुर्माना के बाद  भी किस नियम और किस सक्षम अधिकारी के आदेश  से  पंचायत मित्र की नौकरी बरकरार  रखी गई है।किस सक्षम अधिकारी के आदेश से  यह पंचायत मित्र के पद पर कार्यरत हैं। 
 
नियमानुसार जैल में रहते हुए  ड्यूटी से अनुपस्थित  की हालत में संविदा स्वतः समाप्त हो जाती हैं।ऐसी स्थिति में  पंचायत मित्र  सुनील कुमार की नौकरी बहाल  कैसे है?मामले की तह तक पहुंचने के लिए सूचना अधिकार अधिनियम से  जानकारी चाही गई है। जिला पंचायत राज कार्यालय से जानकारी मिलने के बाद  मामले का होगा खुलासा और कई जिम्मेदार लोगों  पर भी आएगी  कार्रवाई की आंच।
 
मामले की सी एम पोर्टल पर  शिकायत कर  जांच कराये जाने की मांग  किए जाने की बात कही गई है। यदि  मामले की हो निष्पक्ष जांच  तो  नौकरी  तो जाएगी ही साथ ही  होगी मानदेय के रूप में ली गई धनराशि की  रिकवरी।

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