जयपुर की सड़कों पर पहली बार गूंजा सेना दिवस का शौर्य
आमजन के बीच हुई ऐतिहासिक परेड ने दिखाया भारत की सैन्य शक्ति और राष्ट्रीय संकल्प
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जयपुर ने गुरुवार को ऐसा दृश्य देखा जो इतिहास में दर्ज हो गया। 78वें सेना दिवस के अवसर पर पहली बार मुख्य सेना परेड आर्मी कैंट क्षेत्र से बाहर निकालकर शहर की सड़कों पर आम नागरिकों के बीच आयोजित की गई। हरे कृष्णा मार्ग और महल रोड पर जब सेना के टैंक, आधुनिक हथियार प्रणालियां, युद्धक टुकड़ियां और आकाश में गरजते फाइटर जेट दिखाई दिए तो करीब डेढ़ लाख से अधिक लोगों का उत्साह देखते ही बनता था। तिरंगे लहराते हाथ, भारत माता की जय के गगनभेदी नारे और गर्व से भरी आंखों ने इस आयोजन को केवल सैन्य प्रदर्शन नहीं बल्कि जन-जन की सहभागिता वाला राष्ट्रीय उत्सव बना दिया।
सेना दिवस के इस ऐतिहासिक आयोजन में देश की सैन्य ताकत, अनुशासन और आत्मनिर्भरता का सशक्त संदेश दिया गया। राजधानी जयपुर की सड़कें उस समय देशभक्ति के रंग में रंग गईं जब परेड में भारतीय सेना ने अपनी अत्याधुनिक क्षमताओं का प्रदर्शन किया। जगुआर फाइटर जेट, ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर, टैंक, एयर डिफेंस सिस्टम और भैरव बटालियन द्वारा प्रस्तुत रोबोटिक डॉग्स ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारतीय सेना भविष्य की चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार है। तकनीक और परंपरा का यह संगम लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एसएमएस स्टेडियम में आयोजित शौर्य संध्या कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अभी समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक आतंक की सोच पूरी तरह समाप्त नहीं होती, तब तक शांति के लिए भारत का प्रयास जारी रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने केवल अपनी सैन्य शक्ति ही नहीं दिखाई बल्कि अपने राष्ट्रीय स्वभाव और मानवीय मूल्यों का भी परिचय दिया। पूरी कार्रवाई में यह सुनिश्चित किया गया कि मानवीय दृष्टिकोण बना रहे और निर्दोषों को कोई नुकसान न पहुंचे। उनके शब्दों में आत्मविश्वास और संकल्प दोनों झलक रहे थे।
परेड के दौरान भारतीय वायुसेना की भागीदारी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। पाकिस्तान सीमा से लगभग 150 किलोमीटर दूर बीकानेर के नाल एयरबेस से उड़ान भरकर तीन जगुआर फाइटर जेट सीधे जयपुर पहुंचे और परेड स्थल के ऊपर से हवाई पास्ट किया। अपाचे, प्रचंड और ध्रुव हेलिकॉप्टरों ने आसमान में उड़ान भरते हुए पुष्पवर्षा की। जैसे ही हेलिकॉप्टरों से फूल बरसने लगे, नीचे खड़े लोगों की आंखें नम हो गईं और पूरा वातावरण देशभक्ति के भाव से भर उठा। यह दृश्य न केवल सैन्य सामर्थ्य का प्रदर्शन था बल्कि सेना और जनता के बीच गहरे भावनात्मक संबंध का भी प्रतीक था।
ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए वीर जवानों को इस अवसर पर विशेष श्रद्धांजलि दी गई। 25 पंजाब रेजिमेंट के सूबेदार मेजर पवन कुमार, 625 ईएमई बटालियन के हवलदार सुनील कुमार सिंह, 5 फील्ड रेजिमेंट के लांस नायक दिनेश कुमार, 7 जाट रेजिमेंट के लांस नायक सुभाष कुमार और 1 पैरा स्पेशल फोर्सेज के लांस नायक प्रदीप कुमार को मरणोपरांत वीरता पुरस्कार प्रदान किए गए। जब इन शहीदों के नाम मंच से पुकारे गए तो पूरा स्टेडियम सम्मान में खड़ा हो गया। यह पल गर्व के साथ-साथ गहरी संवेदना से भी भरा हुआ था।
सेना दिवस समारोह की शुरुआत आर्मी एरिया स्थित प्रेरणा स्थल पर पुष्पांजलि कार्यक्रम से हुई। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने सप्त शक्ति कमान के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ शहीद जवानों को पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने ऑपरेशन सिंदूर में वीरगति को प्राप्त सैनिकों की वीरांगनाओं को सम्मानित किया। इस दौरान कई भावुक क्षण देखने को मिले। पंजाब रेजिमेंट के सूबेदार मेजर शहीद पवन कुमार की माता सम्मान समारोह के दौरान भावुक होकर बेसुध हो गईं। यह दृश्य यह याद दिलाने के लिए काफी था कि देश की सुरक्षा की कीमत कितने परिवार अपने आंसुओं और बलिदान से चुकाते हैं।
इस बार सेना दिवस की परेड को आमजन के बीच आयोजित करने का निर्णय अपने आप में एक बड़ा संदेश था। इसका उद्देश्य सेना और नागरिकों के बीच की दूरी को कम करना और यह दिखाना था कि भारतीय सेना केवल सीमाओं पर तैनात एक संस्था नहीं बल्कि देश के हर नागरिक की सुरक्षा और सम्मान की प्रतीक है। जयपुर की सड़कों पर बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, महिलाओं से लेकर युवाओं तक, हर वर्ग के लोग इस आयोजन के साक्षी बने। कई लोगों के लिए यह पहली बार था जब उन्होंने इतनी नजदीक से सेना के हथियार, टैंक और जवानों को देखा।
परेड में आत्मनिर्भर भारत की झलक भी साफ दिखाई दी। स्वदेशी हथियार प्रणालियों और तकनीकों ने यह साबित किया कि भारत अब रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ब्रह्मोस मिसाइल और पिनाका जैसे सिस्टम केवल हथियार नहीं बल्कि भारत की वैज्ञानिक क्षमता और रणनीतिक सोच के प्रतीक हैं। रोबोटिक डॉग्स और आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम ने भविष्य की युद्ध तकनीक की झलक भी दिखाई, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि भारतीय सेना बदलते समय के साथ खुद को लगातार उन्नत कर रही है।
जयपुर में आयोजित यह सेना दिवस समारोह केवल एक परेड या कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह एक संदेश था। यह संदेश था कि भारत शांति चाहता है लेकिन अपनी सुरक्षा और संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेगा। यह संदेश था कि आतंक और हिंसा की सोच के खिलाफ भारत का संघर्ष जारी रहेगा। यह संदेश था कि सेना और जनता एक साथ खड़े हैं।
जब शाम को एसएमएस स्टेडियम में शौर्य संध्या कार्यक्रम के दौरान सांस्कृतिक प्रस्तुतियां हुईं और सैन्य बैंड की धुनों पर देशभक्ति के गीत गूंजे, तो पूरा माहौल गौरव और सम्मान से भर गया। जयपुर की धरती ने उस दिन केवल एक शहर के रूप में नहीं बल्कि पूरे देश की भावना के रूप में सांस ली।
78वां सेना दिवस जयपुर के लिए हमेशा यादगार रहेगा। पहली बार आम सड़कों पर हुई मुख्य परेड ने इतिहास रच दिया और यह साबित कर दिया कि भारतीय सेना का शौर्य केवल सीमाओं तक सीमित नहीं है, वह हर भारतीय के दिल में बसता है। यह दिन उन शहीदों को नमन करने का था जिन्होंने देश के लिए अपना सर्वस्व अर्पित कर दिया और उन जवानों को सलाम करने का था जो हर पल देश की रक्षा के लिए तैयार खड़े हैं।
कांतिलाल मांडोत
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