वैदिक मंत्रों की गूंज और दीपों की आभा में श्रद्धालु हो रहे भाव-विभोर

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प्रयागराज। नैनी स्थित अरैल परमार्थ घाट इन दिनों भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का जीवंत केंद्र बन चुका है।सायंकाल जैसे ही सूर्य अस्ताचल की ओर बढ़ता है, वैसे ही यमुना तट पर भक्ति की एक अलौकिक धारा प्रवाहित होने लगती है।परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष, विश्वविख्यात संत स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि जी महाराज के सान्निध्य में प्रतिदिन भव्य यमुना आरती का आयोजन किया जा रहा है, जो श्रद्धालुओं के मन को गहरे तक छू रहा है।आरती की शुरुआत बटुकों द्वारा किए जा रहे वैदिक मंत्रोच्चार से होती है।

शंखनाद, घंटियों की मधुर ध्वनि और मंत्रों की पवित्र गूंज पूरे घाट को आध्यात्मिक वातावरण से भर देती है। दीपों की कतार जब यमुना मां के चरणों में सजती है, तो ऐसा प्रतीत होता है मानो स्वयं मां यमुना अपने भक्तों को आशीर्वाद दे रही हों। इसके बाद प्रस्तुत होने वाली भजन संध्या श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर देती है। इस भव्य आयोजन में प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होने पहुंच रहे हैं।

दूर- दराज से आए श्रद्धालु, साधु- संत, महिलाएं, बच्चे और युवा—सभी एक साथ मां यमुना की आराधना में लीन नजर आते हैं। विशेष रूप से माघ मेले के दौरान परमार्थ घाट पर श्रद्धालुओं की संख्या और भी बढ़ गई है। संगम नगरी में आए कल्पवासी और स्नानार्थी आरती में सम्मिलित होकर अपने जीवन को धन्य मान रहे हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि यमुना आरती में शामिल होकर मन को अद्भुत शांति और सकारात्मक ऊर्जा की अनुभूति होती है। घाट पर फैली भक्ति की यह धारा न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत कर रही है, बल्कि प्रयागराज की आध्यात्मिक पहचान को भी और अधिक गौरवशाली बना रही है।

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