जिले में शासन द्वारा दिया जा रहा है मातृत्व वंदन” योजना की आड़ में लूट राज
बस्ती में सरकारी योजनाएँ या संगठित लूट का मिशन नहीं मिल पा रहा है जनता को योजना का लाभ
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बस्ती । बस्ती जिले में शासन प्रशासन के निष्क्रिय होने के कारण सरकार किसी योजना का नाम “मातृत्व वंदन” रखती है, तो वह केवल पैसे नहीं देती—वह सम्मान, सुरक्षा और भरोसा देती है। लेकिन बस्ती से आई यह खबर बताती है कि इस पवित्र नाम को लूट का लाइसेंस बना दिया गया है। 60 लाख की चोरी नहीं, यह सिस्टम का बलात्कार है. प्रधानमंत्री मातृत्व वंदन योजना में लगभग 60 लाख रुपये की गड़बड़ी सामने आई है। पर असली अपराध यह नहीं कि पैसा गया—असली अपराध यह है कि सरकार को यह भी नहीं पता कि पैसा गया कहाँ।
जिन खातों में रकम ट्रांसफर हुई, उनके केवल अंतिम चार अंक उपलब्ध हैं।
पूरा खाता नंबर?गायब। यह लापरवाही नहीं है। यह पूर्व नियोजित अंधेरा है। जबजांच भी अभिनय बन जाए,सीडीओ की अध्यक्षता में जांच टीम बनी।
डीपीओ से दस्तावेज़ मांगे गए। बैंकों से जानकारी मांगी गई।और हर बार जवाब आया—“अभिलेख उपलब्ध नहीं”“जानकारी नहीं मिल सकी”“जांच अभी जारी है”
यह जांच नहीं है। यह समय खरीदने की साज़िश है।कौन है इस ‘मिशनरी भ्रष्टाचार’ का सूत्रधार? इस योजना में:आवेदन आंगनबाड़ी भरती है,सत्यापन वही करती है
सुपरवाइज़र मुहर लगाता है,सीडीपीओ फाइल आगे बढ़ाता है,पैसा सीधे खाते में जाता है,इतने स्तर,इतनी
मिलीभगत, और फिर भी “किसी को कुछ नहीं पता” — यह सिस्टम की सामूहिक बेईमानी है।फर्जी लाभार्थी कैसे पैदा हुए? रिपोर्ट बताती है:हजार से अधिक खातों में पैसाकई लाभार्थी पात्र नहीं,कई खातों में बार-बार ट्रांसफर,तो सवाल सीधा है:क्या फर्जी महिलाओं की एंट्री हुई?क्या एक महिला को कई बार पैसा मिला?या खातों का इस्तेमाल केवल पैसा घुमाने के लिए हुआ?यह कोई छोटी गड़बड़ी नहीं।यह मनी-लॉन्ड्रिंग का ग्रामीण मॉडल है।बस्ती: क्यों बार-बार ही प्रयोगशाला? बस्ती कोई पहला मामला नहीं है।बस्ती बार-बार इसलिए चुना जाता है क्योंकि:निगरानी ढीली है,जवाबदेही कमजोर है“छोटा ज़िला” कहकर मामले दबा दिए जाते हैं.यही वजह है कि योजनाएँ यहाँ सबसे पहले लूटी जाती हैं।
महिला सम्मान की खुली नीलामी मातृत्व वंदन योजना:गर्भवती महिला के लिए
पहली बेटी के लिए पोषण और सुरक्षा के लिए और यहाँ—दलालफर्जी खाते चार-डिजिट की कहानीयह केवल आर्थिक अपराध नहीं है। यह नारी सम्मान का अपमान है।प्रशासनिक मौन = अपराध में साझेदारी यदि प्रशासन ईमानदार होता:FIR होती,खाते फ्रीज़ होते,वसूली शुरू होती,नाम सार्वजनिक होते लेकिन यहा —“जांच चल रही है”याद रखिए:जहाँ जांच लंबी होती है, वहाँ अपराध सुरक्षित रहता है।यह योजना नहीं, सिस्टम बदनाम है.योजना सही है। नियत गलत है।और जब नियत सड़ती है, तो सबसे पहले माँ और बेटी लुटती हैं। जो सिस्टम गर्भवती महिला की रक्षा नहीं कर सकता, वह राष्ट्र की रक्षा क्या करेगा?
अब भी सवाल बाकी हैं किस अधिकारी की फाइल से पैसा निकला? किस बैंक ब्रांच ने बिना KYC के ट्रांसफर किया? किसने खातों को छिपाया?किसे बचाया जा रहा है? जब तक इन सवालों के नाम नहीं मिलते, तब तक यह मानना पड़ेगा— यह भ्रष्टाचार नहीं, संगठित अपराध है। अंतिम चेतावनीयदि आज 60 लाख पर चुप्पी है,तो कल 6 करोड़ पर होगी।और परसों योजना ही लुट जाएगी।मातृत्व को मत लूटिए।यह पैसा नहीं,भारत का भविष्य है।
जब कोई सरकार किसी योजना का नाम “मातृत्व वंदन” रखती है, तो वह केवल पैसे नहीं देती—वह सम्मान, सुरक्षा और भरोसा देती है। लेकिन बस्ती से आई यह खबर बताती है कि इस पवित्र नाम को लूट का लाइसेंस बना दिया गया है। 60 लाख की चोरी नहीं, यह सिस्टम का बलात्कार है. प्रधानमंत्री मातृत्व वंदन योजना में लगभग 60 लाख रुपये की गड़बड़ी सामने आई है। पर असली अपराध यह नहीं कि पैसा गया—असली अपराध यह है कि सरकार को यह भी नहीं पता कि पैसा गया कहाँ।
जिन खातों में रकम ट्रांसफर हुई, उनके केवल अंतिम चार अंक उपलब्ध हैं। पूरा खाता नंबर?गायब। यह लापरवाही नहीं है। यह पूर्व नियोजित अंधेरा है। जबजांच भी अभिनय बन जाए,सीडीओ की अध्यक्षता में जांच टीम बनी। डीपीओ से दस्तावेज़ मांगे गए। बैंकों से जानकारी मांगी गई।और हर बार जवाब आयाअभिलेख उपलब्ध नहीं”“जानकारी नहीं मिल सकी”“जांच अभी जारी है” यह जांच नहीं है। यह समय खरीदने की साज़िश है।
कौन है इस ‘मिशनरी भ्रष्टाचार’ का सूत्रधार? इस योजना में:आवेदन आंगनबाड़ी भरती है,सत्यापन वही करती है सुपरवाइज़र मुहर लगाता है,सीडीपीओ फाइल आगे बढ़ाता है,पैसा सीधे खाते में जाता है,इतने स्तर,इतनी मिलीभगत, और फिर भी “किसी को कुछ नहीं पता” — यह सिस्टम की सामूहिक बेईमानी है।फर्जी लाभार्थी कैसे पैदा हुए? रिपोर्ट बताती है:हजार से अधिक खातों में पैसाकई लाभार्थी पात्र नहीं,कई खातों में बार-बार ट्रांसफर,तो सवाल सीधा है:क्या फर्जी महिलाओं की एंट्री हुई?क्या एक महिला को कई बार पैसा मिला?
या खातों का इस्तेमाल केवल पैसा घुमाने के लिए हुआ?यह कोई छोटी गड़बड़ी नहीं।यह मनी-लॉन्ड्रिंग का ग्रामीण मॉडल है।बस्ती: क्यों बार-बार ही प्रयोगशाला? बस्ती कोई पहला मामला नहीं है।बस्ती बार-बार इसलिए चुना जाता है क्योंकि:निगरानी ढीली है,जवाबदेही कमजोर है“छोटा ज़िला” कहकर मामले दबा दिए जाते हैं.यही वजह है कि योजनाएँ यहाँ सबसे पहले लूटी जाती हैं।महिला सम्मान की खुली नीलामी मातृत्व वंदन योजना:गर्भवती महिला के लिएपहली बेटी के लिए पोषण और सुरक्षा के लिए और यहाँ—दलालफर्जी खाते
चार-डिजिट की कहानीयह केवल आर्थिक अपराध नहीं है।
यह नारी सम्मान का अपमान है।प्रशासनिक मौन = अपराध में साझेदारी यदि प्रशासन ईमानदार होता:FIR होती,खाते फ्रीज़ होते,वसूली शुरू होती,नाम सार्वजनिक होते लेकिन यहाँजांच चल रही है”याद रखिए:जहाँ जांच लंबी होती है, वहाँ अपराध सुरक्षित रहता है।यह योजना नहीं, सिस्टम बदनाम है.योजना सही है। नियत गलत है।और जब नियत सड़ती है, तो सबसे पहले माँ और बेटी लुटती हैं। जो सिस्टम गर्भवती महिला की रक्षा नहीं कर सकता, वह राष्ट्र की रक्षा क्या करेगा? अब भी सवाल बाकी हैं किस अधिकारी की फाइल से पैसा निकला? किस बैंक ब्रांच ने बिना KYC के ट्रांसफर किया? किसने खातों को छिपाया?किसे बचाया जा रहा है? जब तक इन सवालों के नाम नहीं मिलते, तब तक यह मानना पड़ेगा— यह भ्रष्टाचार नहीं, संगठित अपराध है। अंतिम चेतावनीयदि आज 60 लाख पर चुप्पी है,तो कल 6 करोड़ पर होगी।और परसों योजना ही लुट जाएगी।मातृत्व को मत लूटिए।यह पैसा नहीं,भारत का भविष्य है।
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