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सैंड आर्टिस्ट अजय द्वारा मनाली रोहतांग के बर्फ पहाड़ी पर की गई पर्यावरण बचाने की अपील।
स्वतंत्र प्रभात।
ब्यूरो प्रयागराज।
सैंड आर्ट के माध्यम से हमेशा से लोगों को जागरुक करते चले आ रहे सैंड आर्टिस्ट अजय गुप्ता इस बार मनाली के रोहतांग बर्फीली पहाड़ी पर छोटा सा *आइस आर्ट* कर लोगों को जागरूक किया। और कहा जैसा कि हम।लोग देख रहे है हर जगह 100 से भी अधिक एकड़ में जंगल की कटाई और इसके स्थान पर पार्क बनाने की योजना विकास के नाम पर विनाश का रूप ले रही है।
यह कदम पर्यावरण और जैव विविधता के लिए गंभीर खतरे का संकेत है। जब हम विकास की बात करते हैं, तो अक्सर यह माना जाता है कि यह केवल आधुनिकता और उन्नति का प्रतीक होता है। लेकिन विकास के इस रूप को देखने का एक और दृष्टिकोण भी है – यह प्रकृति और हमारे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक बड़ी क्षति हो सकती है।
हजारों एकड़ का जंगल, जब सड़क व पार्क में तब्दील होगा, वह सिर्फ पेड़ों और हरियाली का गढ़ नहीं, बल्कि यह अनेकों जीवों और वनस्पतियों का घर होता। इन जीवों के लिए यह जंगल न केवल आश्रय का स्थान है, बल्कि उनके जीवन के लिए आवश्यक संसाधन भी यहीं उपलब्ध है। पेड़ों की जड़ों से लेकर उनकी शाखाओं तक, हर तत्व का इस वन में एक विशिष्ट भूमिका है, जब इन जंगलों की कटाई होती है, तो यह ना केवल एक पर्यावरणीय नुकसान है, बल्कि यह उन जीवों के जीवन में भी असंतुलन पैदा कर देता है।
यहां सवाल उठता है कि इन जीवों का क्या होगा? क्या उनका घर, उनका आश्रय, उनके जीवन का स्रोत, सब कुछ केवल एक सड़क, पार्क की भव्य इमारतों में बदल जाएगा? इन जीवों को कहां जाने का स्थान मिलेगा? क्या उन्हें नया घर मिलेगा या फिर वे शहरों की ओर पलायन करेंगे, जहां पहले से ही संसाधनों की कमी है और उनकी अस्तित्व के लिए उपयुक्त वातावरण नहीं है? सबसे बड़ी शर्म की बात यह है कि हम लोग असली जानवर मारकर असली पेड़ काटकर फाइबर की मूर्ति के जानवर बनाकर लोगों को संदेश देते हैं।

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