ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव सहित टी. ए. व रोजगार सेवक की कामधेनु बनकर रह गई मनरेगा योजना

फर्जी मास्टर रोल मे फर्जी हाज़िरी लगाकर एवं फर्जी फोटो अपलोड कर डकारा जा रहा मनरेगा का धन

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लखीमपुर खीरी-  भले ही सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ जहां भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए जीरो टारलेंस की नीति लागू कर रहे हो पर जिले के विभागीय जिम्मेदारो की धनलोलुप्त की वजह से  योगी के आदेशों का कोई असर पड़ता नजर नहीं आ रहा है मामला विकास क्षेत्र लखीमपुर की ग्राम पंचायत चोरहा जिम्मेदार अधिकारी व पंचायत सचिव व पंचायत मित्र की मिली भगत के चल रहा फर्जीवाड़ा मनरेगा के तहत मजदूरो के खाते में ट्रांसफर किये गये हजारों रुपए व बैंक से निकल भी गए।
 
जो उनके व्यक्तिगत लोग है फर्जी मैठ बना कर खड़ा कर दिया जाता है जो की वो लोग केवल घूमने जाते है जब कोई पूछता है बोलते है कि हम मैट हूं कोई काम नहीं करूंगा कानून देखा जाए तो एक ही मैट होना चाहिए और एक पानी पिलाने वाला और इस ग्राम पंचायत में 5 मैट है जो एक साथ मनरेगा का कार्य करते हैजो कभी घर से बाहर नहीं निकलते हैं वो आदमी की आड़ में बैंक से घर बैठे निकाल रहे हैं मनरेगा का पैसा, ग्राम पंचायत चौराहा में महात्मागांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में भ्रष्टाचार का तड़का लग चुका हैं।
 
पूरा मामला ग्राम पंचायत चोरहा का हैं। जहां के ग्रामीणों के खातों में बिना मजदूरी किए इस योजना का पैसा ग्राम पंचायत सचिव व पंचायत मित्र जिम्मेदार अधिकारी की मिली भगत से पंचायत मित्र अपने  ही चाहते अपने खास आदमी के खाते में मनरेगा का पैसे ट्रांसफर कर दिया जाता है ।इसके बाद ग्राम चोरहा के पंचायत मित्र की मिली भगत से कुछ पैसे देकर पूरा पैसा खुद की जेब में रख लिया जाता है।
 
यह जिम्मेदार लोग कई सालों से फर्जीवाड़ा मनरेगा में  कामनहीं कर रहे हैं और अपने चहेतों के खातो में पैसा ट्रांसफर कर के निकाल रहे हैं।अब देखना यह होगा कि खबर चलने के बाद इन फर्जीवाड़ा करने वालों पर क्या कुछ कार्रवाई होती है या ऐसे ही मामला दब जाएगा।अगली खबर जिन लोगों के खातों में फर्जी तरीके से पैसा ट्रांसफर किया गया है।उसके बाद कुछ पैसा देकर निकाल लिया गया है  अब नाम सहित खबर होगी उजागर।
 
 ग्राम पंचायत चौराहा में मनरेगा योजना अंतर्गत किए गए मजदूरों के भुगतानों की सूची पर एक नजर डालें तो सूची में दर्ज नाम में से 50% से अधिक ऐसे लोग हैं जो कभी काम करने गए ही नहीं है इनकी फर्जी फोटो अपलोड कर फर्जी हाजिरी लगा करके एक व्यापक स्तर पर उनके खातों में पैसा डालकर मनरेगा योजना को आए सरकारी धन का बंदरबाट कर अपनी-अपनी तिजोरिया भर लिए जाने का मामला जन चर्चा का विषय बना है सूत्र बताते हैं।
 
अधिकांश लोग कभी काम करने ही नहीं जाते हैं और उनको 100 दिवस का रोजगार दिया जाना दर्शाया गया है और इसी के तहत उनके खातों में भुगतान भी भेजा गया यदि जिम्मेदार अधिकारी ने मामले का संज्ञान और कारण निष्पक्ष जांच तो मनरेगा योजना में एक बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा होगा देखना अब यह है की खंड विकास अधिकारी से लेकर जिला स्तरीय मनरेगा उपायुक्त द्वारा इस मामले पर क्या कार्रवाई की जाती है।

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