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ईंट भट्टों पर जा रही तूरी, सड़क पर मौत बन कर दौड़ रहे ट्रैक्टर
-एनजीटी क्षेत्र से बाहर जनपद के बाहरी हिस्से में हैं एक सैकडा से अधिक ईंट भट्टे
मथुरा। अब तूरी से ईंट पकाई जा रही हैं। ये ईंट लाल हो जाती हैं लेकिन उतनी बजूबत नहीं होती है। इन भट्टों परं टीटीजेड क्षेत्र में उगाई जाने वाली सरसों की तूरी को ट्रेक्टर ट्राली से ढोकर लाया जाता है। नौहझील मथुरा मार्ग पर तूरी से लदे ओवरलोड टैक्टर इस मार्ग पर आफत बन गये है टैक्टर के पीछे लगी ट्राली को इस तरीके से लोड किया जाता है कि ट्राली के चारों तरफ चार पांच फुट वाहर की तरफ निकला होता है जिससे आगे पीछे से आने वाले वाहनों को साइड तक दिखाई नही देती आये दिन यह तूरी से लदे टैक्टर ट्राली बीच बीच सड़क पर पलट जाते है जिससे मार्ग भी कई कई धन्टो अवरुद्ध रहता है इसके अलाबा ईंट, बालू व मिट्टी लेकर दौड़ रहे ट्रैक्टर हादसों का पर्याय बने हुए हैं।
इनकी चपेट में आने से आए दिन लोगों की जान जा रही है लेकिन जिम्मेदार इस ओर से आंखे मूंदे हुए हैं। नौहझील से लेकर मथुरा तक सड़कों पर बालू, मिट्टी, ईट व तूरी लदे ट्रैक्टरों को बेलगाम दौड़ते देखा जा सकता है जो क्षमता से कहीं अधिक तूरी ईंट, बालू आदि सामान भरकर दौड़ रहे हैं। ट्रैक्टर चालक आगे पीछे आ जा रहे वाहनों की परवाह किए बिना कहीं भी ओवरटेक व मोड़ देते हैं। इससे पीछे चलने वाहन टकरा कर हादसे के शिकार हो जाते हैं।
तमाम चालकों ने ट्रैक्टर में स्पीकर व स्टीरियो लगवा रखे हैं। उन्हें तेज आवाज में बजाकर चलते हैं। इससे न तो हार्न सुनाई देता है और न ही किसी की आवाज सुनते हैं और अपनी धुन में तेज रफ्तार से चलते रहते हैं। ओवरलोड होने से ट्रैक्टरों को आपात स्थिति में रोकना मुश्किल हो जाता है। ट्रैक्टर चला रहे तमाम चालक न केवल नौ सीखिए बल्कि अधिकांश के पास ड्राइबिंग लाइसेंस तक नहीं है और व नियम कानूनों को दरकिनार कर ओवरलोड ट्रैक्टरों को सड़कों पर दौड़ा रहे हैं। इन ट्रैक्टरों से आए दिन सड़कों पर हादसे हो रहे हैं

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