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ओबरा में सौंदर्यीकरण बना मुसीबत, फव्वारों ने निगली सड़कों की चौड़ाई
डिग्री कॉलेज के पास भीषण टक्कर, बाईक सवार घायल
ब्यूरो रिपोर्ट
ओबरा/ सोनभद्र-
नगर पंचायत ओबरा में सौंदर्यीकरण के नाम पर बनाए गए फव्वारे अब जनता के लिए जी का जंजाल और दुर्घटनाओं का सबब बन रहे हैं। सड़कों के बीचों-बीच बने इन फव्वारों के कारण सड़कों की चौड़ाई कम हो गई है, जिससे आए दिन वाहन आपस में टकरा रहे हैं। ताजा मामला डिग्री कॉलेज के पास का है, जहां दो मोटरसाइकिलों की आमने-सामने जोरदार भिड़ंत में कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि डिग्री कॉलेज के पास पहले एक छोटा स्ट्रीट लाइट चबूतरा (चौतरा) हुआ करता था, जिससे यातायात में कोई बाधा नहीं आती थी। लेकिन हाल ही में नगर पंचायत ने इसे बड़ा कर वहां फव्वारा बना दिया।इस फव्वारे ने सड़क की लगभग पूरी चौड़ाई घेर ली है।आज डिग्री कॉलेज के पास सड़क संकरी होने के कारण दो बाइक सवारों में भीषण टक्कर हो गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि घायलों को गंभीर फ्रैक्चर आए हैं। यही स्थिति शारदा मंदिर चौराहे की भी है। नगर पंचायत द्वारा बनाए गए बड़े-बड़े फव्वारों ने चौराहे को इतना संकुचित कर दिया है कि बड़े वाहनों के मुड़ने की जगह ही नहीं बची है। सौंदर्यीकरण के इस मॉडल ने नगर की व्यवस्थित यातायात व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। नगर पंचायत द्वारा किए गए इस नियोजन (प्लानिंग) पर अब सवाल उठने लगे हैं।
ग्रामीणों और राहगीरों का कहना है कि सड़क पर चलने की जगह कम कर फव्वारे बनाने का क्या तर्क है? क्या इन फव्वारों को बनाने से पहले सड़क सुरक्षा मानकों (Road Safety Standards) का ध्यान रखा गया। इन हादसों में जो लोग घायल हो रहे हैं और जिनके परिवार उजड़ रहे हैं, उनकी जिम्मेदारी नगर पंचायत लेगा या संबंधित अधिकारी?स्थानीय लोगों का आरोप है कि सौंदर्यीकरण के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग तो हुआ ही, साथ ही लोगों की जान भी जोखिम में डाल दी गई है। यदि इन फव्वारों के आकार को छोटा नहीं किया गया या सड़क को चौड़ा नहीं किया गया, तो आने वाले समय में यहाँ और भी बड़े हादसे हो सकते हैं।
ओबरा की जनता ने जिला प्रशासन और शासन से मांग की है कि इन दुर्घटनाओं का संज्ञान लेते हुए फव्वारों की स्थिति की समीक्षा की जाए। सड़क घेरकर बनाए गए इन निर्माणों को हटाकर सड़क को सुचारू किया जाए ताकि भविष्य में किसी की जान न जाए।सौंदर्यीकरण का मतलब लोगों की जान लेना नहीं होना चाहिए। सड़क चलने के लिए होती है, तमाशा दिखाने के लिए नहीं।

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