ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी में कश्मीर मुद्दे को लेकर विवादित बहस, पाकिस्तानियों को भारतीय छात्र आदर्श मिश्रा ने दिया करारा जवाब

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International Desk 

पाकिस्तान विभिन्न मंचों पर कश्मीर को लेकर दुष्प्रचार अभियान चलाता रहता है लेकिन भारत और भारतीय हर मंच पर पाकिस्तान को करारा जवाब देते हैं। ताजा मामला लंदन से सामने आया है जहां भारतीय छात्रों के एक समूह ने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय की ऑक्सफोर्ड यूनियन सोसाइटी में कश्मीर पर आयोजित एक बहस के विरोध में नारे लगाए और तख्तियां दिखाईं। विरोध प्रदर्शनों के दौरान ‘भारत माता की जय’ और ‘ऑक्सफोर्ड यूनियन आतंकवाद के साथ खड़ा है’ के नारे लगाए गए।

हम आपको बता दें कि इस बहस में आतंकवाद से जुड़ाव रखने वाले वक्ताओं को मंच दिया गया। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में बृहस्पतिवार शाम को ‘कश्मीर को एक स्वतंत्र प्रदेश के रूप में देखने’ संबंधी एक प्रस्ताव के पक्ष में बोलते हुए जम्मू और कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) से जुड़े जफर खान और ‘वर्ल्ड कश्मीर फ्रीडम मूवमेंट’ से जुड़े मुजम्मिल अयूब ठाकुर ने भी भाषण दिया। हम आपको याद दिला दें कि इस साल मार्च में भारत ने आतंकवाद के आरोपी यासीन मलिक की अगुआई वाले जेकेएलएफ पर प्रतिबंध को अगले पांच साल के लिए बढ़ा दिया था।

हम आपको बता दें कि विदेशों में पाकिस्तानी एजेंडे को आगे बढ़ाने वाले प्रोफेसर जफर खान के संबोधन को पाकिस्तानी मीडिया में खूब तवज्जो मिली है। प्रोफेसर जफर खान ने अपने संबोधन में जम्मू-कश्मीर को लेकर भारत की सरकार, सेना और मीडिया पर तमाम तरह के आरोप लगाये। पाकिस्तानी मीडिया ने तो यहां तक दावा किया है कि इस सत्र के दौरान कई भारतीय छात्र भी शामिल थे जिन्होंने इस प्रस्ताव का समर्थन किया कि जम्मू-कश्मीर मुद्दे का हल निकालने के लिए उसे स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए।

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लखनऊ के आदर्श ने बीच डिबेट में लगा दी फटकार

गुरुवार को आयोजित कार्यक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इस वीडियो में लखनऊ के आदर्श मिश्रा नजर आ रहे हैं. उन्होंने बताया कि वहां एक डिबेट चल रही थी, मैंने उसमें बाधा डाली, वहां एक प्रतिबंधित संगठन को बुलाया गया था. ये मुझे बर्दाश्त नहीं हुआ. डिबेट में कश्मीर मुद्दे पर चर्चा के लिए JKLF को बुलाया गया था, कश्मीर नरसंहार का आरोपी फारूक अहमद डार इसका सदस्य है.

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उन्होंने कहा कि वहां भारत का पक्ष नहीं रखा जा रहा था, इसलिए मैंने लोगों को साफ कर दिया कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग था, है और रहेगा. आदर्श मिश्रा ने बताया कि ऐसा लग रहा था जैसे पाकिस्तान की ISI ने वहां डिबेट आयोजित की हो. आदर्श ने बताया कि उन्हें कश्मीर के प्रवासियों से लगाव है, और पिछले साल वो कश्मीर भी गए थे. ऑक्सफोर्ड में जो डिबेट चल रही थी, उसमें कश्मीरी पंडितों की राय नहीं सुनी गई, डिबेट एकतरफा थी, इसलिए मैंने भारत का पक्ष रखा.

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इस बहस के खिलाफ भारतीय प्रवासी संगठनों ने रैली निकाली, जिसमें ऑक्सफोर्ड हिंदू सोसाइटी भी शामिल थी। हम आपको बता दें कि ऑक्सफोर्ड यूनियन को कार्यक्रम रद्द करने के लिए एक औपचारिक पत्र भी जारी किया गया था। ऑक्सफोर्ड हिंदू सोसाइटी के पत्र में कहा गया था कि यह ध्यान देने योग्य है कि ये दोनों वक्ता हिंदू विरोधी घृणा फैलाने में शामिल रहे हैं और ऐसे संगठनों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं जिनका ब्रिटेन के साथ-साथ भारत के केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ घृणा फैलाने से संबंध है। पत्र में कहा गया था कि हिंदू छात्र इस बात से भयभीत और निराश महसूस कर रहे हैं कि ऑक्सफोर्ड यूनियन ने जेकेएलएफ से जुड़े व्यक्ति को आमंत्रित किया है-जिसका हिंदुओं पर हमला करने का रिकॉर्ड है।

दूसरी ओर, कार्यक्रम के दौरान के जो वीडियो इस समय सोशल मीडिया पर वायरल हैं उसमें साफ देखा जा सकता है कि भारतीय छात्रों ने इस दौरान जमकर विरोध जताया। इंडियन ऑक्सफोर्ड यूनियन के सदस्य आदर्श मिश्रा ने बहस के दौरान हस्तक्षेप करते हुए कहा, ‘‘जेकेएलएफ एक आतंकी संगठन है।’’ सामुदायिक संगठन ‘इनसाइट यूके’ द्वारा ‘एक्स’ पर साझा किए गए एक वीडियो के अनुसार, आदर्श मिश्रा को यह कहते हुए सुना जा सकता है ‘‘मुझे इस मंच पर भरोसा नहीं है और मैंने (ऑक्सफोर्ड यूनियन के) अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है।’’ आदर्श मिश्रा ने कहा कि जफर खान और मुजम्मिल अयूब ठाकुर ‘‘(पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी) आईएसआई और पाकिस्तान के लिए कठपुतली के तौर पर काम कर रहे हैं। हम आपको बता दें कि ‘इनसाइट यूके’ विश्वविद्यालय में भारतीय छात्रों के नेतृत्व में प्रदर्शन का समर्थन करने वाले समूहों में से एक है।

‘इनसाइट यूके’ द्वारा ऑक्सफोर्ड यूनियन को लिखे गए पत्र में कहा गया था कि कश्मीर क्षेत्र दशकों से आतंकवाद का निशाना रहा है, जिसके कारण हजारों कश्मीरी हिंदुओं को जबरन पलायन करना पड़ा और अनगिनत पीड़ाएं झेलनी पड़ीं। पत्र में कहा गया है कि कश्मीर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का अभिन्न अंग माना जाता है और इस पर सवाल उठाने वाली कोई भी बहस भारत की संप्रभुता के लिए चुनौती है। हम आपको बता दें कि ऑक्सफोर्ड यूनियन की स्थापना 1823 में हुई थी। विभिन्न विषयों पर यहां जोरदार बहस होती रही है।

भारत ब्रिटेन संबंधों पर असर

आक्सफोर्ड यूनियन में हुई इस बहस को लेकर लंदन में रहने वाले भारतीयों में गुस्सा है. भारतीय छात्रों ने ऑक्सफ़ोर्ड यूनियन के बाहर प्रदर्शन भी किया है. इस तरह के विवाद से भारत और यूके के संबंधों पर असर पड़ सकता है. खासतौर पर ब्रिटेन में रहने वाले भारतीय समुदाय पर. वहां के भारतीय समुदायों को इस घटना को लेकर कॉफी डर है. उन्हें डर है कि इस घटना के बाद कहीं गलतफहमियां बढ़ न जाए. जिससे कूटनीतिक संबंधों में तनाव पैदा हो सकता है.

 

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