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संजीव-नीl
हरियाणा,जम्मू-काश्मीर चुनाव पर विशेष।
मतदाता एक दिन का राजाl
एक मतदान के पावन दिन
लगाकर कपड़ों में चमकदार रिन
एक पार्टी के उम्मीदवार
लगते थे मानो है सूबेदार,
बिना लंबा भाषण गाये
मुस्कुरा कर मेरे पास आए,
बोले-
कृपया अपने मताधिकार का लोकतंत्र के हथियार का
भरपूर करें प्रयोग
दिमाग का करें उपयोग
आप एक दिन के हैं राजा
लोकतंत्र के हैं महाराजा
बाद के पांच वर्षों में प्रतिदिन
आपकी इच्छाओं का
बजने वाला है बाजा,
यही लोकतंत्र का है मजा
गलत उम्मीदवार को चुनोगे
तो आगे पाओगे बड़ी सजा
हमने पूछा
यह क्या होता है लोकतंत्र
वह जोर-जोर से हंसे बोले
यह है अलौकिक तंत्र
और है प्रजातंत्र का मंत्र।
मिलता है मतदाता को
वोट देने का
बस एक दिन का अधिकार
मतदान करने जाता सपरिवार,
आगामी पांच साल कोसता है
बाद मेंअपनी किस्मत
को जार-जार रोता है
पूरा का पूरा परिवार
यही तो रहता है
एकदिन के मतदान का शाहकार,
बाकी दिनों जनता
मचाती खूब हाहाकार,
यही है लोकतंत्र का अधिकार।
अब समझ जाओ कितना
तुम्हारे पास है
बड़ा लोकतंत्र का यह अधिकार।
संजीव ठाकुर

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