राहुल ने ईवीएम को एक ब्लैक बॉक्स बताया , चुनावी प्रक्रिया पर उठ रहे गंभीर सवाल

टेस्ला और स्पेसएक्स के चीफ एलन मस्क ने हैकिंग के प्रति इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के इस्तेमाल के खिलाफ सलाह दी है। 

राहुल ने ईवीएम को एक ब्लैक बॉक्स बताया , चुनावी प्रक्रिया पर उठ रहे गंभीर सवाल

स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो।
 
टेस्ला और स्पेसएक्स के चीफ एलन मस्क ने हैकिंग के प्रति संभावित कमजोरियों के बारे में चिंताओं का हवाला देते हुए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के इस्तेमाल के खिलाफ सलाह दी है। उनकी टिप्पणी दुनिया भर में ईवीएम की सुरक्षा पर बढ़ती बहस के बीच आई है, खासकर प्यूर्टो रिको के हालिया प्राइमरी चुनावों में अनियमितताओं के आरोपों के बाद। भारत में चुनाव ईवीएम से होते हैं और देश में ईवीएम से वोटों की धांधली जनमानस में चिन्ता का विषय बना हुआ है। एलोन मस्क के इस बयाँ के बाद भारत में एक बार फिर चुनावों में ईवीएम के इस्तेमाल के खिलाफ बहस छिड़  गयी है। 
 
भारत में चुनाव के दौरान ईवीएम को लेकर विपक्षी दल अक्सर आरोप लगाते रहते हैं।
भारत में चुनाव के दौरान ईवीएम को लेकर विपक्षी दल अक्सर आरोप लगाते रहते हैं। विपक्ष की शिकायत रहती है कि ईवीएम से मतदान होने की वजह से निष्पक्षता की कमी रहती है। इस बार भी लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस समेत कई दलों ने ईवीएम में छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया था।पूनम  अग्रवालने एक लख में कहा है कि लोकसभा चुनाव24 में 140 से अधिक सीटों पर ईवीएम से डाले गए वोटों से अधिक मत गिने गए।कुछ मामलों में गिने गए ईवीएम के मतों की संख्या ईवीएम में डाले गए मतों की संख्या से कम है।हालांकि, इसके पीछे के कारणों को स्पष्ट करने के लिए आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया गया है, लेकिन कुछ मामलों में गिने गए मतों की संख्या में कमी संबंधित सीट पर जीत के अंतर का लगभग आधा है।  
 
क्विंट की रिपोर्ट में कहा गया है कि ईवीएम में चुनाव के दिन डाले गए वोट और परिणाम को गिनती किए गए वोट में अंतर देखने को मिला है.  362 लोकसभा सीटों पर 5,54,598 वोट 'खारिज' किए गए।
 
राहुल गांधी ने कहा ईवीएम ब्लैक बॉक्स है।
 
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर इस मुद्दे को उठाकर चर्चा शुरू कर दी है। उन्होंने ईवीएम को ब्लैक बॉक्स बताते हुए कहा कि किसी को भी इसकी जांच करने का इजाजत नहीं है।
राहुल गांधी ने दुनिया के एक्स के मालिक एलन मस्क की एक पोस्ट को रिपोस्ट किया और एक अंग्रेजी अखबार का हवाला दिया। पोस्ट के साथ उन्होंने लिखा, “भारत में ईवीएम एक “ब्लैक बॉक्स”है, और किसी को भी उसकी जांच करने की अनुमति नहीं है। हमारी चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर गंभीर चिंताएं जताई जा रही हैं। जब संस्थाओं में जवाबदेही का अभाव होता है तो लोकतंत्र दिखावा बन जाता है और धोखाधड़ी की आशंका बढ़ जाती है।”
मस्क का पोस्ट अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव को लेकर था। उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन से नहीं कराने की सलाह दी है। अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा, “इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों को खत्म कर देना चाहिए। इसे इंसानों या एआई द्वारा हैक किए जाने का खतरा है, हालांकि ये खतरा कम है, फिर भी बहुत ज्यादा है।”
 
महाराष्ट्र की घटना ने तूल पकड़ा। एफआईआर दर्ज।
 
ईवीएम विवाद के पीछे महाराष्ट्र की घटना भी है। वहां पर कथित तौर पर मुंबई उत्तर-पश्चिम लोकसभा क्षेत्र में शिंदे गुट के उम्मीदवार रवींद्र वायकर और उद्धव ठाकरे गुट के अमोल कीर्तिकर के बीच कांटे की टक्कर थी। कीर्तिकर यह सीट केवल 48 वोटों से हार गए। उनकी पार्टी शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट ने नतीजे को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। उन्होंने एक बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि शिंदे गुट के उम्मीदवार रवींद्र वायकर के रिश्तेदार ने अपने फोन से ईवीएम को कनेक्ट कर ओटीपी के जरिए उसको अनलॉक कर दिया और उसमें छेड़छाड़ की।
 
चुनाव आयोग के पास पहुंचा मामला।
 
उन्होंने इस मुद्दे को चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट में ले जाने का ऐलान किया है। उनकी शिकायत पर वनराई पुलिस ने रवीन्द्र वायकर के रिश्तेदार मंगेश पांडिलकर और चुनाव आयोग के एनकोर ऑपरेटर दिनेश गुरव के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस ने मोबाइल को फारेंसिक जांच के लिए भेज दिया है और ईवीएम में छेड़छाड़ मामले की जांच कर रही है।
 
2019 में भी डाटा में अंतर पाया गया था।
 
पूनम अग्रवाल ने याद दिलाया है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में मैंने सबसे पहले क्विंट के लिए अपनी रिपोर्ट में ईवीएम में डाले गए वोटों और ईवीएम में गिने गए वोटों के डेटा में पाई गई विसंगतियों के बारे में बताया था। पांच साल बाद एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स द्वारा 2019 में दायर याचिका के आधार पर इस मामले की सुनवाई 2024 में सुप्रीम कोर्ट में भी हुई।
 
सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग (ईसी) ने 2019 के चुनावों के दौरान कई संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों में पाई गई विसंगतियों के सभी दावों को खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ताओं और मीडिया ने चुनाव आयोग के ऐप पर प्रकाशित मतदान की अनुमानित संख्या के आंकड़ों पर विचार किया था, और यही कारण है कि उनका डेटा गिने गए वोटों की वास्तविक संख्या से मेल नहीं खाता था।
 
2024 के लोकसभा चुनाव के आंकड़ों में लगभग सभी संसदीय क्षेत्रों में विसंगतियां देखने को मिलती हैं. 543 संसदीय क्षेत्रों से प्राप्त चुनाव आयोग के डेटा पर बारीकी से नज़र डालने पर पता चलता है कि दमन और दीव, लक्षद्वीप और केरल के अतिंगल जैसे कुछ संसदीय क्षेत्रों को छोड़ दें तो गिने गए ईवीएम वोटों की संख्या ईवीएम में डाले गए वोटों की संख्या से अलग है।
 
 
 

140 से ज़्यादा लोकसभा क्षेत्रों में ईवीएम में गिने गए मतों की संख्या ईवीएम में डाले गए मतों की संख्या से अधिक थी।

 
 
140 से ज़्यादा लोकसभा क्षेत्रों में ईवीएम में गिने गए मतों की संख्या ईवीएम में डाले गए मतों की संख्या से अधिक थी।अंतर 2 वोट से लेकर 3,811 वोट के बीच था।ऐसे भी मामले हैं जहां मतदान किए गए मतों की तुलना में कम मतों की गिनती की गई। उन लोकसभा क्षेत्रों में जहां गिने गए ईवीएम मतों की संख्या डाले गए ईवीएम मतों से कम थी, वहां सबसे अधिक अंतर -16,791 मतों का पाया गया।
 
गौरतलब है कि अमेरिका के प्यूर्टो रिको में ईवीएम सुरक्षा पर चर्चा तेज है। वहां के प्राइमरी चुनाव में ईवीएम को लेकर कई अनियमितताएं सामने आईं। हालाँकि, एक पेपर ट्रेल ने चुनाव अधिकारियों को वोटों की संख्या की पहचान करने और सही करने की अनुमति दी।
 
 
दरअसल, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी के भतीजे और 2024 के अमेरिकी चुनावों के लिए एक स्वतंत्र उम्मीदवार रॉबर्ट एफ कैनेडी जूनियर ने ईवीएम पर टिप्पणी की थी। कैनेडी ने लिखा था, "प्यूर्टो रिको के प्राथमिक चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों से संबंधित सैकड़ों मतदान अनियमितताओं का अनुभव हुआ, एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, सौभाग्य से, एक पेपर ट्रेल था इसलिए समस्या फौरन पता चल गई और वोट मिलान को ठीक किया गया। उन क्षेत्रों में क्या होता होगा, जहां कोई पेपर ट्रेल नहीं है?"
कैनेडी जूनियर ने चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक हस्तक्षेप को रोकने के लिए बैलेट पेपर की वापसी की वकालत की, जिससे यह तय हो सके कि हर वोट की गिनती हो और चुनाव सुरक्षित रहें। भारत में भी इसी तरह की मांग लगातार हो रही है लेकिन भारत की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट इस जिद पर अड़ी हुई है कि इतने बड़े देश में ईवीएम ही ठीक है।
 

ईवीएम पर सवाल उठाना  बीजेपी को पसंद नहीं।

 
 
सुप्रीम कोर्ट ने इस साल वोटर-वेरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपीएटी) मशीनों से निकलने वाली पेपर पर्चियों के माध्यम से ईवीएम पर डाले गए वोटों के क्रॉस-सत्यापन के मुद्दे पर सुनवाई की थी। जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ ने प्रति विधानसभा क्षेत्र में पांच रैंडम ढंग से चयनित ईवीएम को सत्यापित करने की मौजूदा प्रथा को बरकरार रखते हुए 100 प्रतिशत क्रॉस-सत्यापन की मांग करने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया था।
 
एलन मस्क का ईवीएम पर बयान भाजपा को पसंद नहीं आया। उसने पूर्व मंत्री राजीव चंद्रशेखर के जरिए एलोन मस्क को जवाब दिया है। चंद्रशेखर ने एक्स पर लिखा है-  "यह एक चलता-फिरता बयान है। इसका अर्थ यह निकल रहा है कि कोई भी सुरक्षित डिजिटल हार्डवेयर नहीं बना सकता। गलत।" उन्होंने कहा-  "कोई कनेक्टिविटी नहीं, कोई ब्लूटूथ, वाईफाई, इंटरनेट नहीं; अंदर जाने का कोई रास्ता नहीं है। फ़ैक्टरी-प्रोग्राम्ड कंट्रोल जिन्हें दोबारा प्रोग्राम नहीं किया जा सकता।
 
इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों को उसी तरह से डिज़ाइन और निर्मित किया जा सकता है जैसा कि भारत ने किया है। हमें एक ट्यूटोरियल चलाने में खुशी होगी, एलोन ।" यानी चंद्रशेखर ने एलन मस्क के बयान को हल्के से उड़ा दिया और कहा कि भारत उन्हें इस मामले में ट्यूशन दे सकता है।

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