संजीव-नी।

अपने स्वयं को पहचानो l

संजीव-नी।

अपने स्वयं को पहचानो l

परिश्रम और बलिदान।
महान राष्ट्र की पहचान,
युवा उठो जागो
अपने स्वयं को पहचानो,
श्रम शक्ति और लगन,
देश के विकास के लिए
तुम्हें पैदा करनी है अगन।

भारत है युवाओं का देश
अनेक है यहां परिवेश,
हमें आत्मनिर्भर है होना
विकास के योगदानों को
हमें नहीं है किसी तरह खोना,
सुई से लेकर जहाज तक,
आलू से लेकर चावल दाल तक
हमें उत्पादन है बहुत बढ़ाना,
उठो वीर देश के नौजवानों

सीमा पर अपना सीना तानों,
युवा कंधों पर है तुम्हारे भार
समृद्धि और विकास की
वृद्धि करनी है आर-पार,
देश में हुए राणा प्रताप,शिवाजी सुभाष, नेहरू और महात्मा गांधी,
तुम्हें ही अपने कामों से बनना है

देश के लिए विकास की बड़ी आंधी,
नव जवानों उठो बढ़ो आगे
तुम्हें देश को ले जाना है
विश्व भर में आगे बहुत आगे,
अपनी शक्ति को पहचानो
भली-भांति उर्जा को जानो,

अपने दम पर सब कर सकते हो
अपने आप को सर्वोत्तम मानो,
उठो युवा वीर हो बलिदानी हो
अपने को तुम श्रेष्ठ ही जानो।

संजीव ठाकुर,

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