पांचवें चरण में दिलचस्प मुकाबला 

पांचवें चरण में दिलचस्प मुकाबला 

पांचवें चरण का चुनाव उत्तर प्रदेश के लिए खास होगा। क्यों कि इस चरण के चुनाव परिणाम पर देशभर की निगाह रहेगी। इसमें रायबरेली से राहुल गांधी, लखनऊ से केन्द्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह केन्द्रीय महिला कल्याण मंत्री स्मृति ईरानी और और केन्द्रीय शहरी विकास राज्य मंत्री कौशल किशोर की प्रतिष्ठा दांव पर होगी। राहुल गांधी दूसरी बार अमेठी के अलावा किसी अन्य सीट रायबरेली से चुनाव मैदान में हैं। पिछले चुनाव में राहुल गांधी दो सीटों से चुनाव लड़े थे अमेठी और वायनाड, राहुल गांधी अमेठी से स्मृति ईरानी से चुनाव हार गए थे जब कि वे वायनाड से भारी मतों से विजई हुए थे। इस बार अपने स्वास्थ्य का हवाला देते हुए सोनिया गांधी ने चुनाव नहीं लड़ने का मन बहुत पहले ही बना लिया था।
 
और वह राज्य सभा के लिए चुन कर चली गई थीं। उसके बाद काफी अटकलों का बाजार गर्म रहा कि आखिर गांधी परिवार की इस परंपरागत सीट से कौन प्रत्याशी होगा। पहले प्रियंका गांधी का नाम आ रहा था फिर अंत समय में राहुल गांधी ने वहां से पर्चा भर दिया। स्मृति ईरानी अमेठी से ही चुनाव लड़ रही हैं। हालांकि उनके विरोध में इस बार राहुल गांधी प्रत्याशी नहीं हैं लेकिन मुकाबला सरल नहीं है। उधर केन्द्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह लखनऊ से तीसरी बार ताल ठोंक रहे हैं। यदि इस बार चुनाव जीतते हैं तो इस बार उनकी हैट्रिक होगी।
 
उत्तर प्रदेश में सही मायने में मुकाबला भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी कांग्रेस के गठबंधन के बीच ही है। बहुजन समाज पार्टी चुनाव में कहीं भी नजर नहीं आ रही है। हां यह ज़रूर है कि वह कहीं गठबंधन को तो कहीं भारतीय जनता पार्टी को नुकसान पहुंचा रही है। पिछला लोकसभा चुनाव बहुजन समाज पार्टी ने समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर लड़ा था और दस लोकसभा सीटों पर विजय प्राप्त की थी लेकिन उसी के बाद हुए विधानसभा चुनाव में बसपा ने अकेले चुनाव लड़ा और वह केवल एक सीट ही हासिल कर सकी। पिछले विधानसभा चुनावों में बसपा का वोट बैंक भी खिसकते हुए दिखा अब यह बोट बैंक किधर शिफ्ट होता है यह देखने वाली बात होगी।रक्षामंत्री राजनाथ सिंह भाजपा से तीसरी बार मैदान में हैं। वहीं, सपा ने अपने जुझारू विधायक रविदास मेहरोत्रा को मैदान में उतारा है। बसपा से सरवर मलिक मैदान में हैं। बसपा भले ही नजर नहीं आ रही हो, पर सपा के वोटबैंक में सेंधमारी तो करेगी ही। ऐसे में इसका सबसे अधिक फायदा भाजपा को ही मिलेगा। वैसे भी लखनऊ को भाजपा का मजबूत गढ़ माना  जाता है। 
 
कांग्रेस से इस बार सोनिया गांधी की जगह राहुल गांधी मैदान में हैं। भाजपा ने योगी सरकार के मंत्री दिनेश प्रताप सिंह को दोबारा उतारा है। वहीं, बसपा ने ठाकुर प्रसाद यादव को मैदान में उतारकर मुकाबले को दिलचस्प बनाने की कोशिश की है। बेटे राहुल की जीत पक्की करने के लिए अस्वस्थ होने के बावजूद सोनिया उनके नामांकन और सभा में शामिल हुईं। भाजपा ने भी इस सीट पर राहुल की राह में कांटे बिछाने की पूरी कोशिश की है। न सिर्फ सपा विधायक मनोज पांडेय को भाजपा में शामिल कर लिया, बल्कि प्रदेश की यह इकलौती सीट है, जिस पर दो बार जनसभा के लिए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह आए। यहां कांग्रेस और भाजपा में सीधी लड़ाई है।
 
चार चरणों के जो मतदान सम्पन्न हुआ है इसमें समाजवादी पार्टी के लिए अच्छी खबर मानी जा रही है जब कि भारतीय जनता पार्टी जद्दोजहद करती दिख रही थी इसलिए भारतीय जनता पार्टी का फोकस पांचवें चरण के चुनाव से लेकर आगे तक है राहुल गांधी की भी परीक्षा होगी। 2019 की बात करें तो पांचवें चरण की 14 सीटों में से रायबरेली को छोड़कर बाकी सभी पर भगवा परचम फहराया था। कांग्रेस का अमेठी का किला भी केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी ने दरका दिया था। इसलिए सबसे बड़ी परीक्षा भाजपा की होनी है। सबकी नजर फैजाबाद सीट पर भी होगी। क्योंकि अयोध्या इसी क्षेत्र में आता है। राममंदिर बनने के बाद यहां पहला चुनाव है। ऐसे में यहां से निकले जनादेश का असर दूर तलक जाएगा। चुनावी चक्रव्यूह कैसा सजा है बता रहे हैं।
 
लगभग तीन साल से राहुल गांधी की राजनैतिक छवि में जबरदस्त उछाल आया है। सोशल मीडिया के माध्यम से जिस तरह उनकी छवि बिगाड़ने की कोशिश की गई थी। राहुल गांधी उससे बिल्कुल घबड़ाए नहीं और अपने कार्य में लगे रहे। राहुल गांधी ने जब भारत जोड़ो यात्रा की शुरुआत की तो उनकी छवि में जबरदस्त इजाफा हुआ और उसी के बाद हुए कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने विजय हासिल की। हालांकि उसके बाद कांग्रेस ने राजस्थान और मध्यप्रदेश को खो दिया लेकिन राजनीतिक में यह सब लगा रहता है। इस बार विपक्ष की स्थिति पिछले चुनाव से मजबूत मानी जा रही है।
 
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस सपा का गठबंधन तेजी से मुकाबले में है तो वहीं बिहार में पूरी तरह से तेजस्वी यादव एनडीए से चुनाव लड़ रहे हैं और बिहार को कांग्रेस ने भी तेजस्वी के हाथों में सौंप दिया है। वहीं बंगाल में ममता बनर्जी अकेले ही सब पर भारी पड़ती दिखाई दे रही हैं। पंजाब में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस मुकाबले में है तो दक्षिण में कांग्रेस की स्थिति ठीक ठाक है। लेकिन राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश से भारतीय जनता पार्टी को बहुत उम्मीद है। जो कि पूरी होती दिखाई दे रही है।
 
जितेन्द्र सिंह पत्रकार 

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