दिल्ली कांग्रेस में इस्तीफे, अलग पार्टी के रणी शिगूफे

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स्वतंत्र प्रभात। एसडी सेठी।

 दिल्ली। लोकसभा रण के बीच दिल्ली कांग्रेस में इस्तीफे का सिलसिला जारी है।इसी कडी में दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष अरविंदर सिंह लवली ने कांग्रेस से पीछा छुडाते हुए अध्यक्ष पद से इस्तीफा तो दिया ही साथ ही अपने साथ के कदावार नेताओ ने भी शुक्रवार  को कांग्रेस का हाथ छोडकर भारतीय जनता पार्टी के फूल को थाम लिया है। भाजपा में शामिल होने वालों में अरविंदर सिंह लवली, राज कुमार चौहान, नसीब सिंह, और अनिल बसोया के नाम प्रमुख है।सभी ने कांग्रेस पार्टी को दिशाहीन होना बताया है। जिसके चलते आम आदमी पार्टी से गठबंधन के अलावा लोकसभा चुनाव में क्षेत्रीय  की जगह बाहरी कैंडीडेट को टिकट देना है। इनमें नोर्थ ईस्ट सीट से कन्हैया कुमार है। जिस पर कांग्रेसियों की टीम ने हाथ खडे कर दिए है। सभी कांग्रेस से पीछा छुडाने वालों का आरोप है कि पार्टी में कोई जन सुनवाई नहीं होती।

कुछ टाॅप लीडरों ने हाई कमान को अंधी गली में डाल दिया है। वह अपनी मनमानी कर रहे हैं। ताजा मामले में नसीब सिंह ने खुलासा किया कि दीपक बाबरिया ने अरविंदर सिंह लवली समेत समेत 21 लोगो को जिनमें  संदीप दीक्षित,राज कुमार चौहान ,नीरज,बसोया जैसे लोगो के नाम थे,इन नेताओ को पार्टी से बाहर निकालने की बात की थी।  पार्टी लाइन के खिलाफ आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोनिया गांधी,शीला दीक्षित के खिलाफ कितना कुफ्र बका ।उन्हें जेल भेजने की बात तक की।आज हालात ये हो गई  कि कांग्रेस पार्टी ने आप के साथ गठबंधन कर समर्पित कार्यकर्ताओ का मनोबल तोड दिया है।ऐसी हालत हो गई कि हम कार्यकर्ताओ को मुंह दिखाने लायक नहीं छोडा है।नसीब सिंह ने तो यहां तक कह डाला कि हाईमान को मिसगाईड किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में कांग्रेस तीन नहीं बल्कि सिर्फ एक सीट पर चुनाव लड रहे हैं।

बाकी दोनो बाहरी नेता है। ये दोनो तो केजरीवाल के ही लोग है।गठबंधन की बात करे तो ये आप नेता अपने पोस्टर में हमारे नेता की फोटो तक नहीं लगा रहे हैं।दरअसल हमें अलग अकेले लडना चाहिए था। पंजाब में कांग्रेस अलग लड रही है ऐसे में नव नियुक्त दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष देवेन्द्र यादव जो पंजाब के भी प्रभारी है ,कैसे समाजस्य बिठाएगें? ये ही सवाल तमाम कार्यकर्ताओ के गले नहीं उतर रहा है। बता दें कि सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस  पार्टी से इस्तीफा दे रहे नेता कांग्रेस में एक और फाड की तैयारी में है। पार्टी का हाथ झटकने वाले नेता दावा कर रहे है कि 35 से 40 नेता आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन से खासे खफा है।

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इनमें से कई और नेता आने वाले दिनों में इस्तीफा दे सकते है। जिस तरह से एक स्ट्रेटजी के तहत इस्तीफे हो रहे हैं इससे इस कयास को बल मिल रहा है कि आने वाले कुछ दिनों में कांग्रेस पार्टी में बगियों की संख्या और बढने वाली है। कांग्रेस पार्टी में बडा टूट हो सकता है।और ये बगावती नेता एक साथ मिलकर अपनी नई पार्टी बना सकते है। नसीब सिंह ने भी खुलासा कर स्थित साफ कर दी है कि नई पार्टी बनाने की पूरी प्लानिंग है। दरअसल अधिकतर स्थानीय  नेताओ  को लगता है कि आप के साथ बेमेल एलाईंस के बाद उनकी राजनीती कमजोर पड रही है।उन्हें अपने भविष्य की चिंता सताने लगी है। बागी नेताओ का मानना है कि अगर आप+कांग्रेस का एलाईस जारी रहा तो अगले दिल्ली विधानसभा चुनाव में उनके टिकट की दावेदारी ही खत्म हो जाएगी।

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ऐसा इसलिए कि अधिकतर इलाके में आप के जीते हुए विधायक है।इससे कांग्रेस के हिस्से में सीटों की संख्या के लाले भी पड सकते है।उल्लेखनीय है कि 15 साल तक लगातार दिल्ली का शासन करने के बाद कांग्रेस पिछले 10 साल से दिल्ली की राजनीतिक हाशिये पर आ गई है। चुनावी जंगी जमीन पर कांग्रेस बहुत पिछड चुकी है। हालत ये है कि राजधानी दिल्ली में एक भी विधायक तक नही है।कांग्रेस दिल्ली में सिर्फ 3-4 प्रतिशत ही रह गई है।ऐसे में एक साथ कांग्रेस के कई नेता पार्टी छोडकर अपनी नई पार्टी बनाते है तो यह सीधा -सीधा संगठन चलाने वालों पर हमला होगा। उनकी कार्यशैली पर भी सवाल खडे होगें।इससे पार्टी ओर कमजोर होगी।  इससे पार्टी का ढांचा जरूर चरमरा जाएगा। पर इन हालात से बेखबर पार्टी के टाॅपररस को क्या परवाह?

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