विशेष लेख

दम तोड़ती कुम्हारों की परंपरा: मिट्टी से जुड़ी संस्कृति और आजीविका पर गहराता संकट डॉ. मणि शंकर द्विवेदी

स्वतंत्र प्रभात ।नैनी, प्रयागराज।  भारत अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक परंपराओं और पारंपरिक व्यवसायों के लिए विश्वभर में जाना जाता है। इन्हीं परंपराओं में कुम्हारों द्वारा मिट्टी के बर्तन बनाने की कला एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। सदियों से...
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ऑपरेशन मिलाप : बिछड़ों को अपनों से मिलाने का मानवीय अभियान, परिवारों के आंसुओं में लौटी खुशियों की रोशनी

किसी घर का बेटा, बेटी, बहन, भाई या माता-पिता अचानक लापता हो जाएं तो उस परिवार पर क्या गुजरती है, इसका अंदाजा वही लगा सकता है जिसने इस पीड़ा को करीब से महसूस किया हो। गुमशुदगी केवल किसी व्यक्ति का...
स्वतंत्र विचार  संपादकीय 

11जून को पंडित रामप्रसाद बिस्मिल की जयंती है!इस अवसर पर यह आलेख है

शाहजहाँपुर की मिट्टी ने 11 जून 1897 को मुझे जन्म दिया था। माँ का नाम मूलमती, पिता का नाम मुरलीधर। घर गरीब था, पर सीना गर्व से भरा था। दादा ग्वालियर से अकाल के दिनों में भागकर यहाँ आए थे।...
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