सह-अस्तित्व
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विविधता से एकात्मता की ओर
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By Swatantra Prabhat UP
प्रो.(डा.) मनमोहन प्रकाश आज विश्व के तमाम देश धार्मिक पहचान, नस्ली अस्मिता, अतिराष्ट्रवाद, युद्ध, सांस्कृतिक टकराव, धार्मिक असहिष्णुता, सामाजिक ध्रुवीकरण और बढ़ती वैचारिक दूरियों जैसी अनेक चुनौतियों से गुजर रहे है। भारत भी इससे अछूता नहीं है।विज्ञान, परिवहन और संचार...
वसुधैव कुटुम्बकम भारत की वैश्विक धारणा और भावना
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By Swatantra Prabhat UP
भारतीय संस्कृति का मूल दर्शन केवल अपने परिवार या राष्ट्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसने संपूर्ण मानवता को एक परिवार मानने की उदात्त दृष्टि प्रदान की है। उपनिषदों का प्रसिद्ध वाक्य "वसुधैव कुटुम्बकम्" केवल एक आदर्श वाक्य नहीं, बल्कि...

