मनरेगा योजना से लेमनग्रास खेती का प्राविधान-उद्यान निरीक्षक ।

मनरेगा योजना से लेमनग्रास खेती का प्राविधान-उद्यान निरीक्षक ।

मनरेगा योजना से लेमनग्रास खेती का प्राविधान-उद्यान निरीक्षक । गौरव पुरी (रिपोर्टर ) ज्ञानपुर,भदोही । विकास खंड मुख्यालय के पुराने कलेक्ट्रेट परिसर स्थित जिला उद्यान विभाग कार्यालय पर गुरुवार को पत्रकारों से एक भेंटवार्ता के दौरान उद्यान निरीक्षक महेन्द्र नाथ त्रिपाठी ने बताया कि किसानों की आय बढ़ाने के लिये औद्यानिक खेती को बढ़ावा देने

मनरेगा योजना से लेमनग्रास खेती का प्राविधान-उद्यान निरीक्षक ।

गौरव पुरी (रिपोर्टर )

ज्ञानपुर,भदोही ।

विकास खंड मुख्यालय के पुराने कलेक्ट्रेट परिसर स्थित जिला उद्यान विभाग कार्यालय पर गुरुवार को पत्रकारों से एक भेंटवार्ता के दौरान उद्यान निरीक्षक महेन्द्र नाथ त्रिपाठी ने बताया कि किसानों की आय बढ़ाने के लिये  औद्यानिक खेती को बढ़ावा देने  की सरकार ने योजना बनाई है।

जिसमें किसानों को कम लागत लगा कर अच्छी आमदनी लेने के लिए मनरेगा योजना से लेमन ग्रास की खेती का प्राविधान है। जिसमें पौध से ले कर मजदूरी तक का पूरा खर्च सरकार वहन करेगी।

किसान इससे अधिक से अधिक फायदा उठा सकेंगे। उन्होंने बताया कि लेमन ग्रास एक औषधीय पौधा है,जिसे एक बार रोपने के बाद पांच वर्ष तक इसकी घास को उपयोग में लाया जा सकेगा। इसके अंतर्गत  विभाग द्वारा  50 हेक्टेयर  की कार्य योजना प्रस्तुत की गई है,जो कि  स्वीकृत हो गई है ।

उसमें समयाभाव के कारण हम सब 15 हेक्टेयर लेमनग्रास  खेती  का कार्य  किसानों के  करवा रहे हैं। इसमें  जो भी लाभार्थी हो वह चाहे अनुसूचित जाति  या अनुसूचित जनजाति का लाभार्थी हो,उसके नाम जमीन हो या
महिला के नाम जमीन हो, अथवा लघु सीमांत कृषक हो।

बताया कि लघु सीमांत कृषक के लिए आवश्यक है कि उसके घर में कोई भी व्यक्ति जॉब कार्ड धारक होना आवश्यक है। जिससे कि मनरेगा मजदूरी की धनराशि हम उसके खाते में भेज दें।कहा कि एक हेक्टेयर में एक लाख 5 हजार 05000 श्रमांस के रूप में उसके खाते में जाएगा।

जिसमें 1 525 मानस दिवस होंगे।इसके अलावा  किसानों को स्वंय उसकी देखरेख करनी है,सिंचाई, निराई और गुड़ाई । बताया कि छह माह में उसकी फसल तैयार हो जाएगी। उसके बाद चार-चार महीने के बाद उसकी कटाई होगी। कहा कि घास से तेल निकलता है,

जो कास्मेटिक के उत्पादों जैसे दर्दनाशक दवाएं,केश तेल, क्रीम, साबुन,इत्यादि बनाने के काम आता है। उक्त तेल की कीमत लगभग 1300 रुपये प्रति लीटर है। एक एकड़ में लगभग डेढ़ क्विंटल तेल प्राप्त किया जा सकता है। तेल को खरीदने के लिए विभाग द्वारा व्यवस्था की जाएगी तथा किसानों को मुफ्त में पौध उपलब्ध करवाया जाएगा।

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