उद्योगों की मनमानी से सरकार की गंगा मैली मौन हुआ प्रशासन

स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो उन्नाव। जिले के तीन छोरो पर बसा उन्नाव जिला चमड़ा औद्योगिक क्षेत्र का सबसे बड़ा शहर माना जाता है। जिले के दही चैकी औद्योगिक क्षेत्र और बंथर व अकरमपुर क्षेत्र के केमिकल इकाईयो द्वारा फैलाये जा रहे जल तथा वायु प्रदूषण से नगर का वातावरण इतना दूषित हो चुका है कि लोगों

स्वतंत्र प्रभात ब्यूरो उन्नाव। जिले के तीन छोरो पर बसा उन्नाव जिला चमड़ा औद्योगिक क्षेत्र का सबसे बड़ा शहर माना जाता है। जिले के दही चैकी औद्योगिक क्षेत्र और बंथर व अकरमपुर क्षेत्र के केमिकल इकाईयो द्वारा फैलाये जा रहे जल तथा वायु प्रदूषण से नगर का वातावरण इतना दूषित हो चुका है कि लोगों का खाना, पानी तथा सांस लेना भी दूभर हो गया है। सबसे अधिक दुष्प्रभाव इन औद्योगिक इकाईयों के आस-पास बसे गांवो के लोगों को भुगतना पड़ रहा है।

वही प्रदूषण विभाग के अधिकारियों की सांठ-गांठ से फैक्ट्री संचालक खुलेआम जिले को दूषित कर रहे है जिले भर में प्रदूषण को लेकर लोग विभागीय अधिकारियों से शिकायत भी करते है लेकिन कार्यवाही भी क्यो करेंगे क्योंकि साहब को प्रदूषण फैलाने के नाम पर फैक्ट्रियों से मोटी-मोटी गड्डियो का बंडल जो मिलता है, बस साहब कार्यवाही भी नोटों के बंडल की तरह तहा कर रख लेते है।आपको बता दे कि जिले के तीन छोरो दहीचैकी,

बंथर तथा अकरमपुर में स्थित चमड़ा तथा केमिकल इकाईयां नगर के पर्यावरण को दिन.प्रतिदिन क्षति पहुंचा रही हैं। वर्तमान में औद्योगिक क्षेत्र बंथर जहां एक बड़ी ग्रीनबेल्ट कहा जाता है वे ग्रीनबेल्ट तथा अब तक कि हरी.भरी फसलें, विशालकाय फलदार पेड़ पर्यावरण संतुलन बनाये थे जो इन औद्योगिक इकाईयो द्वारा फैलाये जा रहे प्रदूषण से नष्ट होते जा रहे हैं। हालांकि इन फैक्ट्रियों के लिए मानक निर्धारित किये गये हैं जो पर्यावरण को संरक्षित रखने में सहायक हैं

परन्तु यह फैक्ट्रियां कभी भी इन मानको का पालन नहीं करती हैं। सूत्रो की माने तो लखनऊ-कानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग के औद्योगिक क्षेत्र बंथर स्थित ओमेगा इण्टरनेशनल, केलको ट्रेनरी, पेप्सिको टेनरी तथा पिंजा टेनरी में मानको को दर-किनार कर मनमानी की जा रही है। भोरपहर तथा देरशाम इन फैक्ट्रियो की चिमनियो से निकलने वाला जहरीला धुंआ वातावरण में भयंकर वायु प्रदूषण फैला रहा है। इस प्रदूषित धुँए से उड़ने वाले कण तथा राख आसपास क्षेत्र के हरे-भरे पेड़ो तथा फसलो पर पड़कर उन्हें नष्ट कर रही है

तो दूसरी ओर इन्हीं फैक्ट्रियों द्वारा अपना प्रदूषित केमिकलयुक्त जहरीला पानी यूपीएसआईडीसी के नालो के माध्यम से सीधे गंगा में बहाया जा रहा है। हालांकि इस जल के शोधन के लिए ट्रीटमेण्ट प्लाण्ट भी बना है लेकिन वहां पानी फिल्टर करने के बदले अच्छी-खासी रकम देनी पड़ती है जिसके चलते यह फैक्ट्रियां बिना शोधित किये ही जल को सीधे नाले के माध्यम से लोन नदी और गंगा में बहा देती हैं। जिसके चलते केन्द्र सरकार की नमामि गंगे योजना पर भी दुष्प्रभाव पड़ रहा है।

आलम यह है कि यह जहरीला पानी जिन-जिन रास्तो से होकर गुजरता है वहां आसपास खेतो की कृषि योग्य भूमि उसरीली हो गयी है तथा यह पानी पीने वाले जानवर भयंकर बीमारियांे की चपेट में आकर असमय मौत के मुंह में समा रहे हैं लेकिन अत्याधिक धन कमाने के लालच में यह फैक्ट्री स्वामी इतने अंधे हो चुके हैं कि उन्हें आम जनमानस पर पड़ रहे इस दुष्प्रभाव से कोई मतलब नहीं है। वहीं क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इस ओर से पूरी तरह बेखबर है या यूं कहें कि सबकुछ जानकर भी मौन है।

सूत्रो की माने तो अपनी इस मनमानी के बदले यह फैक्ट्री मालिकान प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में मोटी रकम हर माह पहंुचाते हैं। जिसके चलते इनपर कोई कार्यवाही नहीं होती लेकिन यही हाल रहा तो वह दिन दूर नहीं जब यह चमड़ा तथा केमिकल इकाईयां शहर को रेगिस्तान में तब्दील कर देंगी।

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