जिपं: घर में नही हैं दाने, अम्मा चली भुनाने

जिपं: घर में नही हैं दाने, अम्मा चली भुनाने

राज्यवित्त की मौजूदा धनराशि से अधिक की कर दी निविदा जारी जिला प्रशासन से जांच कर की कार्यवाही की मांग ललितपुर। घर मेंं नही है दाने, अम्मा चली भुनाने वाली कहा वत इन दिनो जिला पंचायत मेंं चरितार्थ हो रही है। यहां पर राज्यवित्त की मौजूदा धनराशि से लगभग साढ़ चार करोड़ मूल्य के अधिक

 राज्यवित्त की मौजूदा धनराशि से अधिक की कर दी निविदा जारी

जिला प्रशासन से जांच कर की कार्यवाही की मांग 

ललितपुर। घर मेंं नही है दाने, अम्मा चली भुनाने वाली कहा वत इन दिनो जिला पंचायत मेंं चरितार्थ हो रही है। यहां पर राज्यवित्त की मौजूदा धनराशि से लगभग साढ़ चार करोड़ मूल्य के अधिक टेंडर कर दिये गये है। जिला पंचायत में यह खेत पहली बार नही हुआ है। पूर्व अध्यक्ष के कार्यकाल मे भी यही खेल हुआ था, जिसका मुददा अविश्वास के दौरान उठाया गया था। अगर यह कहा जाये तो गलत नही होता यही एक  प्रमुख वित्तीय अनिमित्ता का आरोप अध्यक्ष पर प्रमुखता से सिद्ध हुआ था। इसकी शिकायत प्रभात शर्मा द्वारा जिला प्रशासन को सौंपी गयी, तब यह प्रकरण प्रकाश में आया है। जिला प्रशासन को सौपे शिकायती पत्र में बताया कि जिला पंचायत में उत्तर प्रदेश राज्य वित्त आयोग द्वारा वर्तमान वित्तीय वर्ष में 18 करोड़ रुपया भेजा गया था। जिसमें कर्मचारियों के वेतन भत्तों के लिए 25 प्रतिशत धनराशि ही सुरक्षित रखी गयी है। शेष 75 प्रतिशत धन राशि 13 करोड़ 50 लाख ही शेष विकास कार्यों के लिए शेष बची थी। निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्षा ने पूर्व के वित्तीय वर्ष में राज्य वित्त की मौजूदा धनराशि से अधिक 5 करेाड़ 50 लाख 76 हजार के कार्य कराये थे। जिसका भुगतान वर्ष 2019-20 राज्य वित्त आयोग की धनराशि से किया गया। जिसकी बाद सदस्यों द्वारा शिकायत की गयी, साथ ही वित्तीय अनिमितता का आरोप लगाते हुये, अध्यक्षा के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया। जिसमें सदस्य सफल भी हुये। यही खेल जिला पंचायत में फिर हो गया है। वर्तमान में जिला पंचायत अध्यक्ष ने राज्य वित्त की बाकि बची धनराशि 7 करोड़ 99 लाख 24 हजार के सापेक्ष में 12 करोड़ 56 लाख 57 हजार 616 की निविदा जारी कर दी। मौजूदा धनराशि से अधिक की निविदायें जारी करने के कारण यह बात बुद्धिजीवियों में चर्चा का विषय बन गयी है। तो वहीं पत्र में यह कार्य करने के पीछे अध्यक्षा व उनके परिजनों के ऊपर ठेकेदारों से मोटे कमीशन का भी आरोप लगाया गया है। इस शिकायत से जिला पंचायत में हडक़म्प मचा हुआ है, तो वहीं अध्यक्षा द्वारा जिला पंचायत में होने वाली लूट की चर्चा अब सरे राह होने लगी है।

अध्यक्षा के ससुर भी राजनैतिक भ्रष्टाचारियों में हैं पहले पायदान परनगर पालिका अध्यक्ष रुप में जनता ने जब जिला पंचायत अध्यक्षा के ससुर रमेश खटीक को बैठाया था, तो उन्होंनेे नगर पालिका में भ्रष्टाचार की सभी सीमायें लांघ दी थी, शुरूआत तो उन्होंने नगर पालिका में पड़े डेड स्टॉक से की थी, किन्तु इसके बाद सुम्मेरा तालाब की लाखों मछली बेचने से लेकर कई अभूत पूर्व वित्तीय घोटालों को अंजाम दिया। चर्चा तो यह भी है कि जिला पंचायत अध्यक्षा तो नाम मात्र की हैं, कार्यालय को चला तो उनके ससुर ही रहे हैं। 

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