पालिका: सेवा प्रदाता ठेकेदार ने नहीं हो रही रिकबरी

पालिका: सेवा प्रदाता ठेकेदार ने नहीं हो रही रिकबरी

ईओ की लाखों के गबन में हिस्सेदारी चर्चा में 6 महीने बाद भी नहीं की पालिका प्रशासन द्वारा कार्यवाही ललितपुर। नगर पालिका में सेवा प्रदाता ठेकेदार द्वारा लाखों रुपये का गबन किया गया, जो जांच में सिद्ध भी हो चुका है, किन्तु इसके बाद पालिका ने ठेकदार के खिलाफ रिकबरी निर्धारित नहीं की है। इससे


ईओ की लाखों के गबन में हिस्सेदारी चर्चा में


6 महीने बाद भी नहीं की पालिका प्रशासन द्वारा कार्यवाही


ललितपुर।

नगर पालिका में सेवा प्रदाता ठेकेदार द्वारा लाखों रुपये का गबन किया गया, जो जांच में सिद्ध भी हो चुका है, किन्तु इसके बाद पालिका ने ठेकदार के खिलाफ रिकबरी निर्धारित नहीं की है। इससे कहीं न कहीं पालिका प्रशासन की मिली भगत दिखायी दे रही है। इस पूरे प्रकरण अधिशाषी अधिकारी के ऊपर शक सुई जा रही है। क्योंकि जाँच के पश्चात जिलाधिकारी ने अधिशाषी अधिकारी को ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराते हुये, रिकबरी के आदेश जारी किये थे।


नगर पालिका में भ्रष्टाचार चरम पर है, वहाँ तैनात कर्मचारी सिर्फ पालिका के धन दोहन में लगे हुये हैं, तो वहीं इन भ्रष्ट अधिकारियों व कर्मचारियों को पालिकाध्यक्ष व उनके पति संरक्षण है। यही कारण है कि हालही में जब मण्डायुक्त पालिका निरीक्षण के लिए आये तो उन्होंने पालिका की आय को न के बाराबर पाया, जिससे वह खासे नाराज भी हुये हैं। जब मण्डायुक्त ने निजी श्रोतों व गृहकर से आय के विषय में जानकारी ली, तो अधिशाषी अधिकारी डॉ संजय मिश्रा ने बताया, कि प्रति माह 6 लाख के लगभग आय होती है, जबकि पालिका के कर्मचारियों को प्रतिमाह एक करोड़ से अधिक वेतन वितरीत की जाती है।

ऐसे में पालिका द्वारा वेतन के सापेक्ष सिर्फ 6 प्रतिशत ही वसूली की जाती है। इसका प्रमुख कारण कर्मचारियों द्वारा पालिकाध्यक्ष को सिर्फ पालिका के धन दोहन के तरीके बताने में व्यतीत होता है। जिससे की अध्यक्ष के साथ उनका भी भला हो सके। यही कारण है कि वर्तमान कार्याकाल में प्रत्याशा वोर्ड से अधिकाँश कार्य कराये गये हैं, जिससे की अन्य लोगों व पार्षदों को इन भ्रष्टाचार की खबर न लग सके। ऐसा एक कार्य सेवा प्रदाता ठेकेदार से कराया गया, जहाँ पर कर्मचारियों को नौकरी जाने की धमकी देते हुये, कम वेतन दी गयी,

तो वहीं 100 कर्मचारियों की सिर्फ कागजी कार्यवाही करते हुये, पालिका से भुगतान किया गया है। उन्हें वेतन भी नगद में देना बतायी गयी, क्योंकि कर्मचारी कार्य कर रहे होते तो उनके बैंक खाते भी होते, चूँकि जब कर्मचारी ही नहीं हैं, बैंक खाते कहां से आयेंगे। उपजिलाधिकारी जाँच में भी यह तथ्य उजागर हो चुकी है। जिलाधिकारी ने सेवा प्रदाता के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराकर रिकबरी के आदेेश भी जारी किये गये हैं।

लेकिन अधिशाषी अधिकारी डॉ संजय मिश्र द्वारा एफआईआर तो दर्ज करायी गयी, किन्तु उनसे गबन की गयी, धनराशि की रिकबरी के विषय में कोई भी कार्यवाही नहीं की गयी है, सूत्रों की मानें तो अधिशाषी अधिकारी भी सेवा प्रदाता ठेकेदार के गबन में हिस्सेदार हैं, इसीलिए वह रिकबरी की कार्यवाही के लिए कदम नहीं उठा रहे हैं।

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