‌उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की हत्या में कुलदीप सेंगर समेत सात को 10 साल की सजा

‌उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की हत्या में कुलदीप सेंगर समेत सात को 10 साल की सजा

स्वतंत्रप्रभात प्रयागराज प्रयागराज से दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट। उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की हत्या मामले में दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर समेत सात अन्य को दस साल कैद की सजा सुनाई है। अदालत ने इस मामले में सेंगर और उनके भाई अतुल सेंगर को पीड़िता के परिवार

‌ स्वतंत्रप्रभात 


‌प्रयागराज‌

प्रयागराज से दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट।

उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की हत्या मामले में दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर समेत सात अन्य को दस साल कैद की सजा सुनाई है। अदालत ने इस मामले में सेंगर और उनके भाई अतुल सेंगर को पीड़िता के परिवार को 10-10 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश भी दिया है। सजा सुनाते  हुए  जिला न्यायाधीश धर्मेश शर्मा ने कहा कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि कानून का उल्लंघन किया गया है। सेंगर एक सार्वजनिक पदाधिकारी थे और उन्हें कानून का पालन करना चाहिए था। जिस तरह अपराध किया गया है, उदारता का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता है।


‌न्यायाधीश ने कहा कि इसमें चार नाबालिग बच्चे हैं, जिसमें तीन बच्चियां और एक लड़का है। उन्हें उनके पैतृक स्थान से भी बेदखल कर दिया गया है। सेंगर सहित सात लोग, जिसमें उसका भाई और दो पुलिसकर्मी भी शामिल हैं, उन्हें हत्या का दोषी ठहराया गया।


‌कोर्ट ने इस मामले में सेंगर को दोषी करार देते हुए कहा था कि जिस तरीके से पीड़िता के पिता की हत्या की गई थी, वह जधन्य था। पुलिस कस्टडी में पीड़िता के पिता की नौ अप्रैल 2018 को हत्या हो गई थी। आपको बता दें कि अदालत में सजा पर जिरह के दौरान सेंगर ने कहा था कि अगर उन्होंने कुछ गलत किया है तो उन्हें फांसी पर लटका दिया जाना चाहिए और उनकी आंखों में तेजाब डाल दिया जाना चाहिए। 


‌इस केस में पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर, कामता प्रसाद (सब इंस्पेक्टर), अशोक सिंह भदौरिया (एसएचओ), विनीत मिश्रा उर्फ विनय मिश्रा, बीरेंद्र सिंह उर्फ बउवा सिंह, शशि प्रताप सिंह उर्फ सुमन सिंह और जयदीप सिंह उर्फ अतुल सिंह को कोर्ट ने दोषी करार दिया गया। शैलेंद्र सिंह उर्फ टिंकू सिंह, राम शरण सिंह उर्फ सोनू सिंह, अमीर खान, कॉन्स्टेबल और शरदवीर सिंह कोर्ट से बरी हो गए हैं।


‌कोर्ट ने कुलदीप सेंगर को आपराधिक साजिश का दोषी पाया था।


‌‌ फैसला सुनाते हुए तीस हजारी कोर्ट के जज ने कहा कि यह मेरी जिंदगी का सबसे चुनौतीपूर्ण ट्रायल रहा। जज ने सीबीआई और पीड़ित के वकील की भी सराहना की। तीस हजारी कोर्ट ने इससे पहले 29 फरवरी को इस मामले पर सुनवाई की थी और फैसले के लिए चार मार्च की तिथि तय की थी।
‌सेंगर ने कहा कि उनकी दो बेटियां हैं और न्यायाधीश से आग्रह किया कि उन्हें छोड़ दिया जाए। न्यायाधीश ने कहा कि आपका परिवार है। हर किसी का है। आपको यह सब अपराध करते समय सोचना चाहिए था, लेकिन आपने सभी कानूनों को तोड़ा। अब आप हर चीज को ना कहेंगे? आप कब तक इनकार करते रहेंगे?


‌सीबीआई ने सेंगर एवं अन्य के लिए अधिकतम सजा की मांग की जिसमें मामले में दोषी करार दिए गए दो पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। इसमें माखी थाने के तत्कालीन प्रभारी अशोक सिंह भदौरिया और तत्कालीन उपनिरीक्षक के.पी. सिंह शामिल हैं। सीबीआई के वकील ने कहा कि नौकरशाह होने के नाते इन दो पुलिस अधिकारियों का कर्तव्य था कि कानून-व्यवस्था बनाए रखें, लेकिन उन्होंने अपनी ड्यूटी नहीं की और पीड़िता के पिता का समय पर इलाज नहीं कराया। सीबीआई के वकील ने अदालत से कहा कि ये पुलिस अधिकारी षड्यंत्र में शामिल थे और उन्हें कड़ा दंड मिलना चाहिए। ‌‌उच्चतम न्यायालय  के आदेश पर इस केस को उत्तर प्रदेश के बाहर शिफ्ट कर दिया था। इसके बाद से तीस हजारी कोर्ट में पाँच अगस्त, 2019 से रोज़ाना इस मामले की सुनवाई चल रही थी। इस केस में पीड़िता के पक्ष से कुल 55 लोगों ने गवाही दी। वहीं बचाव पक्ष की तरफ से नौ गवाह कोर्ट में पेश हुए।


‌भारतीय जनता पार्टी के तत्कालीन विधायक कुलदीप सेंगर को नाबालिग से दुष्कर्म करने के मामले में उम्रकैद की सजा हो चुकी है। 16 दिसंबर, 2019 को तीस हजारी कोर्ट ने इस मामले में सेंगर को दोषी ठहराया था और 20 दिसंबर को उम्रकैद की सजा हुई थी।साल 2017 में कुलदीप सेंगर पर एक महिला ने अपहरण और बलात्कार का आरोप लगाया था। जिस वक़्त ये घटना हुई थी उस वक़्त महिला नाबालिग़ थी। पीड़िता सेंगर के घर नौकरी के लिए बात करने गई थी जिसके बाद उसने विधायक के घर पर उसके साथ बलात्कार किए जाने का आरोप लगाया था।सेंगर पर पीड़िता के सामूहिक बलात्कार, उसके और उसके परिवार के ख़िलाफ़ आपराधिक साज़िश और हमले का, पीड़िता के पिता को ग़लत मामले में फंसाने का और फिर हिरासत में पीड़िता के पिता की मौत के मामले में सुनवाई चली थी।


‌पीड़िता का बयान दर्ज करने के लिए दिल्ली के एम्स अस्पताल में एक ख़ास अदालत बैठी थी।सेंगर उत्तर प्रदेश के उन्नाव की बांगरमऊ सीट से चार बार बीजेपी के विधायक रह चुके हैं।उन पर आरोप लगने के बाद अगस्त में उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था।अगस्त में अदालत ने सेंगर और शशि सिंह पर बच्चों के ख़िलाफ़ य़ौन हिंसा (पोक्सो) क़ानून की धारा 376 और 363 के तहत आरोप तय किए थे।


‌अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत में सेंगर कांग्रेसी थे। 2002 के चुनावों से पहले उन्होंने बसपा का दामन थाम लिया और कांग्रेस के प्रत्याशी को बड़े अंतर से हरा दिया।2007 आते-आते उनकी छवि बाहुबली की बन गई थी।इसके बाद उन्होंने सपा का दामन थाम लिया।2012 में भी सपा के टिकट पर उन्होंने चुनाव जीता और 2017 में बीजेपी के टिकट पर वह विधायक बन गए। यानी 2002 से वो लगातार विधायक हैं और अपने राजनीतिक करियर में यूपी की सभी अहम पार्टियों में रहे हैं। 2002 से 2017 के बीच वो बीएसपी, एसपी से विधायक रहे हैं और अभी बीजेपी से विधायक थे।‌‌

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