नवीनतम
फीचर्ड
राजनीति
राष्ट्रीय कार्यक्रमों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में महिला मास्टर ट्रेनरों की सहभागिता क्यों नहीं ?
जिसमें महिलाओं को हर क्षेत्र में समान भागीदारी देने की बात बार-बार कही जाती है
देशभर में राष्ट्रीय कार्यक्रम जनगणना का कार्य आरंभ होने जा रहा है। निर्वाचन की तरह ही जनगणना के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर मास्टर ट्रेनरों को तैयार किया जाता है। किंतु इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में महिला कर्मचारियों की संख्या पुरुषों की तुलना में काफी कम दिखाई देती है, और कई स्थानों पर तो उनकी उपस्थिति बिल्कुल भी नहीं होती। यह स्थिति न केवल चिंताजनक है, बल्कि सरकार के उस संकल्प को भी कमजोर करती है जिसमें महिलाओं को हर क्षेत्र में समान भागीदारी देने की बात बार-बार कही जाती है।
अक्सर देखा गया है कि चुनाव, जनगणना या अन्य राज्य स्तरीय कार्यक्रमों के मास्टर ट्रेनर प्रशिक्षण में महिलाओं की भागीदारी बेहद सीमित रहती है। जबकि जमीनी स्तर पर स्थिति इसके विपरीत है—मैदानी कार्यों में महिला कर्मचारियों की सक्रिय भागीदारी होती है और वे अपने दायित्वों का निर्वहन भी दक्षता और जिम्मेदारी के साथ करती हैं। इसके बावजूद प्रशिक्षण जैसे महत्वपूर्ण चरण में उनकी उपेक्षा समझ से परे है।
जब देश में महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य कर रही हैं, तो राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भी उन्हें समान अवसर मिलना चाहिए। यदि महिला मास्टर ट्रेनरों की नियुक्ति राज्य से लेकर ब्लॉक स्तर तक सुनिश्चित की जाए, तो इससे मैदानी महिला कर्मचारियों को अपनी समस्याएं खुलकर रखने का अवसर मिलेगा। वे अपनी महिला प्रशिक्षकों के साथ अधिक सहज होकर संवाद कर सकेंगी, जिससे प्रशिक्षण की गुणवत्ता भी बेहतर होगी।
यह आवश्यक है कि राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन करते समय विभागीय अधिकारी महिला मास्टर ट्रेनरों की पर्याप्त भागीदारी सुनिश्चित करें। इससे न केवल महिला कर्मचारियों की समस्याओं को बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा, बल्कि सरकार के महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य को भी वास्तविक रूप में आगे बढ़ाया जा सकेगा।
अरविंद रावल


Comments