सजग मतदाता, समर्थ विधायक: लोकतंत्र की असली शक्ति

लोभ या बाहरी प्रभाव के अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर मताधिकार का प्रयोग करे

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प्रो.(डा.) मनमोहन प्रकाश 
 
​भारत जैसे सशक्त और परिपक्व लोकतांत्रिक देश में चुनाव केवल एक राजनीतिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि जनभागीदारी का वह महापर्व है जो राष्ट्र के भविष्य की दिशा निर्धारित करता है। अप्रैल माह में असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में होने जा रहे विधानसभा चुनाव प्रत्येक मतदाता के सामने यह यक्ष प्रश्न खड़ा करते हैं कि उनका भावी विधायक कैसा हो। लोकतंत्र में मतदाता का एक-एक वोट विकास, सुशासन और सामाजिक समरसता की मजबूत नींव रखता है, इसलिए यह अनिवार्य है कि प्रत्येक मतदाता बिना किसी भय, लोभ या बाहरी प्रभाव के अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर मताधिकार का प्रयोग करे।
 
​एक विधायक का चयन करते समय मतदाताओं को यह समझना होगा कि वे केवल एक प्रतिनिधि नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र की आवाज चुन रहे हैं। एक समर्थ विधायक वही है जो ईमानदार, शिक्षित, दूरदर्शी और जनसेवा के प्रति पूर्णतः समर्पित हो। उसका चरित्र स्वच्छ होना चाहिए और वह भ्रष्टाचार व आपराधिक गतिविधियों से मुक्त हो। विधायक केवल चुनाव के समय क्षेत्र में दिखने वाला चेहरा न होकर जनता के सुख-दुख का सहभागी होना चाहिए, जिसमें क्षेत्र की समस्याओं को विधानसभा में प्रभावी ढंग से उठाने की क्षमता हो। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पानी, बिजली और रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दों पर ठोस कार्य करने की सोच ही एक जनप्रतिनिधि को वास्तविक अर्थों में जनसेवक बनाती है।
 
​अक्सर देखा जाता है कि चुनाव के समय जाति, धर्म, भाषा और क्षेत्रीयता जैसे भावनात्मक मुद्दे हावी हो जाते हैं। यहाँ मतदाताओं की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। लोकतंत्र में मतदान केवल एक अधिकार नहीं, बल्कि एक नैतिक और राष्ट्रीय कर्तव्य भी है। सजग मतदाता वही है जो प्रत्याशी और उसकी पार्टी के पिछले कार्यकाल, राजनीतिक दल के घोषणापत्र और उनके द्वारा किए गए वादों की पूर्ति का गंभीर मूल्यांकन करे। धनबल, बाहुबल और लोकलुभावन घोषणाओं से प्रभावित होकर किया गया मतदान लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर करता है, जबकि विवेकपूर्ण मतदान उसे नई शक्ति प्रदान करता है।
 
​भारत में निरंतर होते रहने वाले चुनावों से प्रशासनिक संसाधनों और आर्थिक व्यय पर पड़ने वाले दबाव के कारण 'एक साथ चुनाव' की चर्चाएं भी प्रासंगिक हैं, किंतु व्यवस्था चाहे जो भी हो, वास्तविक शक्ति मतदाता के विवेक में ही निहित रहती है। एक सही चयनित विधायक पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल सकता है, जबकि एक गलत निर्णय विकास की गति को वर्षों पीछे धकेल सकता है। अतः मतदाता का एक वोट आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का फैसला है।
 
​अंततः, मैं यही कहना चाहूंगा कि इन विधानसभा चुनावों में हिंसा रहित, निष्पक्ष और भयमुक्त मतदान हमारे लोकतंत्र की परिपक्वता की परीक्षा है। यदि चुना गया विधायक राष्ट्रहित और सुशासन की भावना से कार्य करता है और मतदाता अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से निभाता है, तो राज्य और देश की प्रगति सुनिश्चित है। सही प्रतिनिधि और जागरूक मतदाता ही एक विकसित राज्य की सच्ची आधारशिला हैं।

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