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गायत्री मंत्र से होता है आत्मिक उत्थान और संकटों का निवारण - कैलाश नाथ तिवारी
कथा व्यास कैलाश नाथ तिवारी ने अपने प्रवचन में कहा कि 24 कलाओं से पूर्ण महाप्रज्ञा गायत्री का अवतार हो चुका है
स्वतंत्र प्रभात संवाददाता
सिद्धार्थनगर,
नगर पंचायत बिस्कोहर क्षेत्र के भरौली कैथोलिया में चल रहे पांच दिवसीय संगीतमय श्रीमद पावन प्रज्ञा पुराण कथा एवं गायत्री महायज्ञ के चौथे दिन रविवार रात श्रद्धालु भक्ति भाव में सराबोर रहे। कथा व्यास कैलाश नाथ तिवारी ने अपने प्रवचन में कहा कि 24 कलाओं से पूर्ण महाप्रज्ञा गायत्री का अवतार हो चुका है और मां गायत्री ही कामधेनु , कल्पवृक्ष तथा पारसमणि के समान हैं, जो साधक के जीवन को सुख, समृद्धि और ज्ञान से भर देती हैं।उन्होंने कहा कि मां गायत्री की आराधना का सर्वोत्तम माध्यम गायत्री मंत्र है। इसी मंत्र की महिमा बताते हुए उन्होंने कहा कि महर्षि विश्वामित्र ने यही दिव्य मंत्र भगवान श्रीराम को प्रदान किया था। आगे चलकर प्रभु श्रीराम ने शबरी को नवधा भक्ति के रूप में इसी मंत्र की दीक्षा दी थी, जिससे उनका जीवन धन्य हो गया।
कथा व्यास ने श्रद्धालुओं को कथा का रसपान करते हुए कहा कि गायत्री मंत्र की संध्या साधना हर नर-नारी को नियमित रूप से करनी चाहिए। इससे मन की शुद्धि होती है, आत्मिक शक्ति बढ़ती है और जीवन में आने वाले संकट दूर होते हैं।कथा के दौरान भजन-कीर्तन और प्रवचन सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए ।
इस अवसर पर मिठाई लाल यादव, आदर्श राम मौर्या, जंगली यादव, लवकुश यादव, स्वामीनाथ तिवारी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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