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शासकीय कुषाभाउ ठाकरे जिला अस्पताल बना लूट का अड्डा
मरीज परेषान सिस्टम सवालांे के घेरे में राजा सितलानी बेलगाम कार्यवाही की उम्मीद
दिनेश चौधरी की ख़ास रिपोर्ट
म.प्र. में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गम्भीर सवाल खड़े हो गए हैं, शासकीय कुषाभाउ ठाकरे जिला अस्पताल शहडोल में जो तस्वीरे और आरोप सामने आ रहे वे न सिर्फ चिंता जनक है बल्कि पूरे सिस्टम के कार्यषैली पर बड़ा प्रष्नचिन्न लगा है। संसनीखेज में मेडिकल सर्टी फिकेट को लेकर अस्पताल में 2000 लेकर मेडिकल सर्टीफिकेट बनाए जाने की बात सामने आ रही है, यदि यह सच है तो यह सीधे सीधे गरीब मरीजों के अधिकारों और सरकारी व्यवस्था के साथ खिलवाड़ है, जिला चिकित्सा अधिकारी निष्क्रिता का परिचय देकर डॉक्टरों के ऊपर कोई लगाम नही एवं जिला अस्पताल सी.एम.ओ. के उपर कोई जबावदेही नजर नही दिख रही।
ओ.पी.डी. से नदारत रहते है, डॉक्टर - राजा सितलानी की हाजिरी का पता नही न कोई मरीज की इंट्री वेतन किस आधार पर मिल रही हुई षिकायत सी.एम. तकअस्पताल में पदस्थ डॉक्टर को लेकर भी गम्भीर सवाल उठ रहे है, बताया जा रहा कि वे अक्सर ओ.पी.डी. से नदारत रहने वाले डॉक्टरों में राजा सितलानी पुनीत हर्ष भूपेन्द्र जैसे सर्जन सामिल है। दूर दराज से आए मरीजों को घंटो भटकना पड़ता है, सरकारी अस्पतालों का मूल उद्देष्य आम जन को सुलभ लाभ देना यदि डॉक्टर ही उपलब्ध न हो, तो व्यवस्था का क्या औचित्य रह जाता है।
कमरा नं. 12 राजनीति का अड्डा
सी.एम.ओ. के नाक के नीचे खुलेआम हो रहा नियम विरूद्ध काम अस्पताल के भीतर ही कमरा नं. 12 को लेकर भी चर्चाए तेज है, कि यहां इलाज से ज्यादा राजनीतिक अखाड़ा देखने को मिलता है। अगर अस्पताल के कमरे में इलाज की जगह डॉक्टर की आपसी प्रतिस्पर्धा सियाषी गतिविधियेां का केन्द्र बन जाए तो यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि मरीजों के साथ अन्याय भी है।
ए.टीम बनाम बी.टीम के अस्पताल में खुलेआम दिख रही गुटबाजी,मुखविर सूत्रों के अनुसार अस्पताल में डाक्टरो के दो गुट सक्रिय बताए जा रहे है पर सी.एम.ओ. एवं जिला चिकित्सा अधिकारी के कान में न सुनाई देता, न दिखायी देता। ए टीम में पुनीत, राजा, हर्ष, और भूपेन्द्र शामिल है। वहीं बी टीम में अ.बी.अ. जैसे शब्दो वाले डॉक्टर बी टीम में मेहनतकष ओ.टी. के साथ आपरेषन थ्रियेटर में नजर आने के बाद ए टीम की धौस सुनते है।
बिना पैसे आपरेषन नही
प्रदेष के मुखिया एवं प्रभारी मंत्री तक पहुची षिकायत शीघ्र दिखेगा बदलाव
सबसे गम्भीर आरोप यह है कि बिना पैसे आपरेषन ए टीम द्वारा नही हो रहे मरीजों को कथित तौर पर हलाकान किया जा रहा है, और अपने अपने प्रायवेट अस्पतालों मंे बुलाकर सजरी कराने का दबाव भी बनाया जा रहा, यदि सरकारी अस्पताल के डॅाक्टर निजी अस्पतालों की ओर मरीजों को मोड़ रहे है, तो यह आचार संहिता और सेवा भावना दोनों के खिलाफ है। दोनों टीम एक दूसरे पर आरोप लगाकर अस्पताल की सारी व्यवस्था पर अंकुष लगाने का प्रयास सी.एम.ओ. प्राथमिकता के तौर पर करना जरूरी है। वहंी जिला चिकित्सा अधिकारी शीघ्र संज्ञान में लेकर सच्चाई के आधार पर कार्यवाही करना न्याय संगत है।
सिस्टम से बड़े सवाल जिला चिकित्सा अधिकारी एवं एक चर्चित डॉक्टर सी.एम. के संज्ञान में
यह पूरा मामला कई अहम सवाल खड़े करता है कि क्या जिला अस्पताल में भ्रष्टाचार की जड़े गहरी हो चुकी है, क्या गरीब मरीजों को जानबूझकर परेषान किया जा रहा है। क्या स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को इन गतिविधियों की जानकारी है या नही सवाल ढेरों षिकायतों के बाद कार्यवाही न कर पनाह क्यो दिया जा रहा।
जिम्मेदारों की जबावदेही जरूरी
यदि आरोपों में सच्चाई है तो यह सिर्फ एक अस्पताल का मामला नही बल्कि पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए चेतावनी है, जनता उम्मीद करती है कि स्वास्थ्य विभाग जिला प्रषासन और जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे मामले की जॉच कर दोषियो पर कार्यवाही शीघ्र करेे, न की दोषी एवं सेवा भाव का कार्य न करने के बाद चाटुकारिता एवं नियम विरूद्ध कार्य करने वालो के ऊपर प्रदेष के मुख्यमंत्री एवं पालक मंत्री तक बिन्दुवार जानकारी देकर कार्यवाही की उम्मीद जिले की जनता ने की है।
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